10 लक्षण पर्व के चौथे दिन बनाई गई आकर्षक रंगोली शुचिता लोभ कषाय के अभाव में उत्पन्न होती है ऐलक श्री क्षीरसागर महाराज
रामगंजमंडी
10 लक्षण पर्व का चौथा दिन उत्तम शौच धर्म के रूप में मनाया गया और इस धर्म की पूजा की गई। सुबह से ही भक्तों की कतार अभिषेक पूजन के लिए दिखाई देने लगती है।
श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अंदर आकर्षक रंगोली बनाई गई जिसे किरण सिंघल, पूजा सिंघल, भावना सिंघल, रुचिका रांवका द्वारा बनाई गई। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए पूज्य ऐलक 105 क्षीरसागर महाराज ने उत्तम शौच धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुचिता पवित्रता लोभ कषाय के अभाव में उत्पन्न होती है। महाराज श्री ने कहा कि शरीर कभी पवित्र नहीं हो सकता है।

चाहे हम कितनी ही कोशिश करले। मन पवित्र हो सकता है लेकिन इंसान कोशिश नही करता। मन की आशा पूर्ण होना समर्थ नहीं है। आशा रूपी गड्ढा विश्व अणु के समान है। हम जो हमारे पास है उसकी आशा नहीं रखते लेकिन दूसरे के पास है उसके प्रति आशा रखते हैं जो व्यर्थ है।

व्यर्थ है जलाना उन्होंने कहा समुद्र में कितनी भी नदियों का जल भरा जाए लेकिन वह तृप्त नहीं होता। श्मशान में कितनी ही अग्नि जलता है लेकिन अग्नि फिर भी तृप्त नहीं होती है। तृष्णा की खाई खूब भरी हुई है। कहा जाता है की तृष्णा की खाई खूब भरी वह रिक्त रही वह रिक्त रही। इंसान में लोग कछाई की परिणिति होती है। इंसान प्राप्त को पर्याप्त नहीं समझता है और दूसरों पर दृष्टि डालता है। व्यक्ति इसीलिए दुखी नहीं है कि उसके पास सब कुछ है लेकिन वह दूसरे के सुख से दुखी है कि उसके पास मुझसे ज्यादा है।

हम व्यक्ति को तृष्णा लालसा से लगाव रहता है। कोई भी व्यक्ति माल खरीदना है। और भाव बढ़ते हैं तो वह बेच देता है। लेकिन वह इस बात से सुखी नहीं होता है कि मुझे लाभ मिला है लेकिन भेजने के बाद अगर और रेट बढ़ जाता है तो वह पछताने लगता है। जितना उसे मिला है उसमें वह संतुष्ट नहीं होता है। आज लोग दिखावे की जिंदगी जा रहे हैं और ऐसे कार्य करते हैं कि लोग नहीं करेंगे तो लोग क्या कहेंगे। जो आवश्यक नहीं है। स्टेटस और दिखावे के लिए व्यक्ति दौड़ने लगता है। और प्रयास में और में शामिल हो जाता है। इंसान जीवन में अपने लोभ के यह दूसरे का जीवन बर्बाद करने तक के लिए तैयार हो जाता है। इंद्रिय की भी क्षति होती है उससे भी बचने का प्रयास करना चाहिए।
स्वास्थ्य की दृष्टि से महाराज श्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को मेहनत करना चाहिए और सुबह उठने के बाद पांच गिलास पानी पीना चाहिए हमें आरोग्य के प्रति भी दृष्टि रखना चाहिए यह सब कुछ शरीर की स्वस्थता के लिए जरूर करें यह इसलिए जरूरी है कि धर्म साधना कर सकें। धर्म साधना के लिए शरीर स्वस्थ होना आवश्यक है। इसलिए हमें इसके लिए समय देना चाहिए। व्यक्ति और और की चाह में फंस जाता है, और लोग के कारण साधु और गुरु के पास जाना भी छोड़ देता है। क्योंकि साधु छोड़ने की बात करते हैं। संतों का सानिध्य व्यक्ति को संतोषी बनता है। जिस व्यक्ति के पास संतोष का सुख नहीं है, वह व्यक्ति चला जाता है। लोभ कषाय को कम करके संतोषी रूपी धन को प्राप्त किया जा सकता है और व्यक्ति सुखी हो सकता है। लोभ पाप का बाप बखाना। लोभ के कारण व्यक्ति पांचो पापों में लिप्त हो जाता है इसी लोभ के कारण व्यक्ति क्रोध करने लगता है, मान करने लगता है और छल कपट करने लगता है। इसीलिए लोभ को पाप का बाप कहा जाता है। महाराज श्री ने कहा कि व्यक्ति यदि संतोष के सुख से ही अपने को पवित्र कर सकता है। और यदि संतोष प्राप्त कर ले तो सब पर विजय प्राप्त कर लेगा। और इसे प्राप्त करने का व्यक्ति को पुरुषार्थ करना चाहिए।
रविवार को पंचमेरु जी के कलश एवं धूप दशमी पर्व मनाया जाएगा
जानकारी देते हुए मंच संचालक राजीव बाकलीवाल, अध्यक्ष दिलीप विनायका, अजीत सेठी ने बताया कि रविवार को सुबह 9:00 बजे पंचमेरू जी के कलश होंगे। एवं संध्या बेला में समाजजन सुगंध दशमी पर्व मनाएंगे। और नगर के जिनालय मे धूप क्षेपन अपने कर्मों की निर्जरा करेंगे।नगर के श्रीमहावीर दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष महेंद्र ठौरा महामंत्री पदम सुरलाया ने जानकारी साझा कर बताया कि आज मंदिर जी में प्रथम अभिषेक शांतिधारा का पुण्य लाभ विमला बाई राजेश निलेश नितेश ठाई परिवार को एवम द्वितीय शांतिधारा का पुण्य लाभ भानु कुमार अंशुल सरवाड़िया को प्राप्त हुआ साथ ही भक्तामर स्तोत्र से मंत्रित 48 दीपकों की महाआरती का सौभाग्य सोहन कुमार हिमांशु हरसौरा परिवार को मिला रविवार को पंचमेरु जी के कलश प्रातः 10:00 बजे होगे एवम संध्याकाल बेला पर धूप क्षेपन नगर के सभी जिनालयो में होगा
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
