कुछ कहकर चले जाते हैं, कुछ सुनकर चले जाते हैं..कुछ देखकर चले जाते हैं, कुछ करके चले जाते हैं..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
गाजियाबाद
जो ज्ञान प्राप्त किया है उसे तदनुरूप आचरण में भी लाइये। गणधर पीठ पर या व्यास पीठ पर बैठकर ज्ञान की ऊँची बातें तब कारगर सिद्ध होती है जब स्वयं के आचरण में आती है।
हमने – आपने बचपन में एक कहानी सुनी थी – किसी तोते को उसके मालिक ने सिखाया था कि शिकारी आयेगा, जाल फैलायेगा, दाना डालेगा, उसमें फसना मत। तोते को यह बात कण्ठस्थ हो गई। एक बार शिकारी आया, जाल बिछाया, दाना डाला और पास में चुपचाप बैठ गया कि देखते हैं कौन फंसता है -? वही तोता आया जिसने कण्ठस्थ कर लिया था कि शिकारी आयेगा, जाल फैलायेगा, दाना डालेगा लेकिन उसमें फंसना मत। फिर क्या था ~तोता आया, जैसे ही दाना खाया और शिकारी के जाल में फंस गया। तोते ने मालिक के शब्दों को कण्ठस्थ तो किया पर हृदयस्थ नहीं कर पाया। इसी प्रकार बहुत से साधु सन्त अच्छी और ऊंची ऊंची ज्ञान की बातें करने वाले, बहुत से प्रवचनकार, कथावाचक, तमाम कुरीतियों पर प्रहार करने वाले, तोते जैसा ज्ञान देकर जाने वाले साधु सन्त स्वयं ही अपनी योजनाओं के मकड़जाल में फंसते जा रहे हैं। 
जो ज्ञान प्राप्त किया है वह पचना भी चाहिए, चारित्र में उतरना चाहिए। दुनिया में जितने भी दुराचारी, चोर बदमाश हुये हैं, वो भी जानते थे कि चोरी नहीं करना चाहिए, झूठ नहीं बोलना चाहिए, छल कपट नहीं करना चाहिए, लेकिन वे खुद को बचा नहीं सके। इसलिए ध्यान रखना! प्रकृति – स्वभाव में जीने की बात करती है और संस्कृति – संस्कारों के रख-रखाव की बात करती है…!!! परम पूज्य गुरुदेव अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज जी ससंध का भव्य मंगल पद विहार दिनाँक 4 दिसम्बर 2025, गुरुवार दोपहर 2.00 बजे


तरुणसागरम् तीर्थ, पिलर नम्बर 807,बंसतपुर सैंतली, मुरादनगर जिला-गाजियाबाद उत्तर प्रदेश सेश्री 1008 नेमीनाथ जिनालय, धनवंतरि हास्पिटल के पास, राजनगर एक्सटेंशन, गाजियाबाद उत्तर प्रदेश 10 किलोमीटर के लिए होगा नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

