दान देने के बाद कोई गरीब नहीं हुआ मुनिश्री भावसागर महाराज 

धर्म

दान देने के बाद कोई गरीब नहीं हुआ मुनिश्री भावसागर महाराज

घाटोल

वासूपूज्य दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य  मुनि श्री 108भाव सागर महाराज ने कहा कि दान की महिमा अपरंपार है धन की तीन गति होती है दान, भोग और नाश। 25%, 17%, 10% अपनी आमदनी का इतना दान करना चाहिए, धन को गाड़कर रखने की अपेक्षा दान देकर धन को गाढ़ा बनाओ।

 

 

 

 

उन्होंने कहा की गोशाला की सुरक्षा में भावना के साथ-साथ धन भी लगाइये। आप दान दे रहे हैं लगा नहीं रहे हैं। कंजूस धन का दान नहीं करता है वह छोड़ जाता है तो दूसरे उसका उपयोग करते हैं। धन त्याग से शोभित होता है। दान देने वाले का हृदय विशाल होता है, मनुष्य कमाता दो हाथ से और खाता एक हाथ से, पुण्य से धन कमाओ और पुण्य कार्य मे लगाओ, गौशाला निर्माण करने वाला भी ऊपर उठता हुआ है।

 

 

 

 

 

 

विशेष उल्लेख करते हुए कहा की करोड़ों व्यक्तियों में एक दाता होता है। दान देते समय विशुद्धि है तो भगवान बनता है। जो देगा उसे और मिलेगा जो बाँटेगा वह और पाने का हकदार हो जाता है। जो रोक लेता है वह सड़ जाता है, कुआँ रोज-रोज लुटाता है और जब लुटाता है तो नए स्रोत आते जाते हैं। दान देने से जीवन व धन दोनों सफल होते हैं। अपने साधनों के अनुरूप दान करो, अन्यथा ईश्वर तुम्हारे दान के अनुरूप तुम्हारे साधन बना देगा।

 

एग्जीबिशन और सेल 14 एवं 15 सितंबर 2023 को रामगंजमंडी महाराजा पैलेस में।
रामगंजमंडी।
दिनांक 14 एवं 15 सितंबर को रामगंज मंडी की होटल महाराजा पैलेस में सुबह 11:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक मुंबई एवं कोलकाता की एनटिक ज्वेलरी एवं सर्टिफाइड डायमंड ज्वेलरी की एग्जीबिशन एवं सेल कोटा की मशहूर ज्वेलर्स पारस ज्वैलर्स के द्वारा लगाई जा रही है। अधिक जानकारी के लिए निम्न नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। 9414180123,9414126451

 

परोपकार के विषय में उल्लेख करते हुए कहा की जो मनुष्य अपनी बढ़ती हुई लक्ष्मी को सर्वदा परोपकार के कार्यों में देता है, उसकी लक्ष्मी सदा सफल है। हमारे देश में त्यागी की पूजा होती है और दानी की प्रशंसा त्याग ही जीवन में सम्मान कराता है, त्याग ही जीवन के सौन्दर्य को निखारता है।

दान देने के बाद नृत्य करके आनंद मनाना चाहिये।
दान देने के बाद आज तक कोई गरीब नहीं हुआ जिन्होंने भी दान दिया, दान देने के बाद जमीन, मकान बेचने का सोचा था लेकिन वह बेचना नहीं पड़ा और दान की राशि चुक गई। दानी और प्रिय बोलने वाले लाखों में भी दुर्लभ है। तुम्हारे द्वारा जोड़े गये धन से समाज, देश, समूह का कल्याण हो, धर्म की प्रभावना हो, संस्कृति की रक्षा हो, राष्ट्र का उत्थान हो और मानवता की सेवा हो । है। बिना मांगे देने पर लाख गुना पुण्य होता है ।। गुप्त दान देने से करोड़ गुना पुण्य होता। दान देने वाला ऊपर उठता जाता है। गृहस्थाश्रम में सिवाय दान के दूसरा कोई कल्याण करने वाला नहीं है। जो विभूति का उपयोग गौशालाओं में गाय की रक्षा में करता है भाग्यशाली होता है। । , दान का सीधा मतलब है अपने तन, मन और धन से औरो की सहायता करना।
दान विघ्नों का नाश करने वाला है शत्रुओं का बैर दूर करने वाला है।
दान से इंसान का नसीब खुलता है दान देने से पूरी दुनिया में यश कीर्ति फैलती है। लोगों में चर्चा होती है। दान दिये बिना सोना नहीं और दान देकर रोना नहीं। दाता करोड़ों में एक मिलता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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