मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज की गृहस्थ अवस्था की माता का तीर्थंकर माता की तरह स्वागत

धर्म

मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज की गृहस्थ अवस्था की माता का तीर्थंकर माता की तरह स्वागत
झुमरीतिलैया

-इस मानव जीवन में मां की ममता का कोई मोल नहीं माँ चाहे तो पुत्र तो भगवान बना दे और माँ चाहे तो पुत्र को गृहस्थ बना दे।

कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा, नवीन जैन ने बताया की मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज की गृहस्थ अवस्था की मां का मंगल आगमन झुमरीतिलैया धर्मनगरी में हुआ। उनका ऐसे स्वागत किया गया जैसे देव लोक तीर्थंकर भगवान की माता का स्वागत करते हैं इस तरह स्थानीय जैन समाज और जैन महिला समाज ने मुनि श्री के गृहस्थ व्यवस्था की माता का गाजे बाजे के साथ भक्ति नृत्य करते हुए एक तीर्थंकर की माता की तरह स्वागत किया सभी ने माता के चरणों में नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

 

 

 

इस बेला में चातुर्मास संयोजिका श्री मति सुनीता सेठी ने कहा माता का स्वागत कर हम अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं ऐसी माता का दर्शन पाकर हम कोडरमा वासी धन्य हो गए हैं। माता श्री ने अपने गृहस्थ अवस्था के पुत्र और वर्तमान में जैन मुनि के चरणों में श्रीफल चढ़ाया और चरणों में नमोस्तु कर भाव विभोर हो गई।

 

गृहस्थ अवस्था की माता श्री ने महाराज श्री के जीवन के विषय में प्रकाश डाला


इस अवसर पर गृहस्थ माताजी ने कहा कि मुनी सुयश सागर महाराज में बचपन से ही त्याग और संयम झलकता था यह हमेशा मंदिर में स्वाध्याय संयम में लीन रहते थे। जो भी जैन संत हमारे नगरी दुर्ग छत्तीसगढ़ में आते थे उनकी सेवा में लग जाते थे।

 

एक बार इनके दर्शन चर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज से हुए तब से इनका जीवन पूरी तरह बदल गया और ब्रह्मचर्य व्रत 10 अक्टूबर 2008 जबलपुर (मध्य प्रदेश) में ग्रहण कर ओर 14 अक्टूबर 2009 अशोकनगर (मध्य प्रदेश) मुनि दीक्षा को ग्रहण कर पूरे देश मे पैदल चलते हुवे धर्म प्रभावना कर रहे है ।इस अवसर पर विशेष रूप से समाज के मंत्री ललित सेठी,राज छाबडा,चातुर्मास के संयोजक नरेन्द्र झांझरी,राजीव छाबडा,सुमित सेठी,सुनीता सेठी,ममता सेठी,हैदराबाद से सुमित पांड्या, कुनकुरी से सी.ए ऋषभ पाटोदी, दुर्ग से लगभग 50 तीर्थयात्री के साथ समाज के सेकड़ो लोग उपस्थित थे।

 

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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