Monk blessing a man wearing a red headband at a ceremony, with a table of books and a microphone nearby.

बोझ का नहीं, बोध का जीवन जियो” — अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

“बोझ का नहीं, बोध का जीवन जियो” — अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

गढ़ी 

अहिंसा और संस्कारों का संदेश लेकर निकल रही पदयात्रा में श्रद्धा और आध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा—

“जो विचार मन को बिगाड़ें,

और जो बातें या व्यक्ति मन पर बोझ बनने लगें…

उनसे दूरी बनाकर रखना ही समझदारी है।”

प्रवचन के दौरान आचार्य श्री ने एक प्रेरणादायक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि एक संत ने अपने शिष्यों से पूछा — सबसे अधिक बोझ कौन-सा जीव उठाकर चलता है?Golden advertisement for an 8×10 inch Premium LED Light Frame featuring Buddha and listed features like UV Print, waterproof, and contact info on the postery background.

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किसी ने गधा, किसी ने ऊँट, किसी ने बैल और हाथी का नाम लिया, लेकिन संत ने मुस्कुराकर कहा—

“ये सभी जीव एक स्थान से दूसरे स्थान तक बोझ ढोते हैं और फिर उतारकर हल्के हो जाते हैं, लेकिन इंसान जीवनभर अपने मन पर विचारों, अपमान, चिंता, व्यापार, परिवार और पापों का बोझ लेकर घूमता रहता है।”

 

 

आचार्य श्री ने कहा कि मनुष्य जिस दिन अपने भीतर के नकारात्मक विचारों और मानसिक बोझ को त्याग देगा, उसी दिन से वह सच्चे अर्थों में इंसानियत का जीवन जीना शुरू कर देगा।

“इसलिए बोझ का नहीं, बोध का जीवन जियो…!!!”

 

 

 

अहिंसा संस्कार पदयात्रा का अगला मंगल विहार अरथूना, डडूका, रेयाना, नोगामा, बागीदोरा, कलिंजरा, अंद्वेश्वर पार्श्वनाथ, कुशलगढ़, दाहोद एवं पुष्पगिरी तीर्थ क्षेत्र की ओर रहेगा।

 

 

 नरेंद्र अजमेरा, पियूष कासलीवाल, औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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