साधना के मार्ग में शाश्वत सुख है निरुपम सागर महाराज
सागर
भाग्योदय परिसर में मुनि श्री 108 निरुपम सागर महाराज जी ने अपने दीक्षा दिवस पर बोलते हुए कहा कि एक मार्ग साधना का और एक मार्ग साधनों का आपने कौन सा मार्ग अपनाया यह निर्भर करता है।
महाराज श्री ने कहा कि साधना में आप ऊपर बैठ जाओगे और साधनों के मार्ग पर आप नीचे बैठे रहोगे। माय इंद्रिय सुख मिलेगा। या कभी-कभी आनंद मिलेगा। लेकिन साधना के मार्ग में शाश्वत सुख है। क्योंकि सही भी धड़कता प्रभु की हुआ करती है मनुष्य के पर्याय में बहुत बहुत कम दुख है लेकिन 84 लाख योनि में घूमने पर आनंद दुख है।

दीक्षा के विषय में बोलते हुए कहा कि दीक्षा की डेट गुरुदेव कभी तय नहीं करते। अचानक सूचना आती है। उन्होंने अपनी दीक्षा के समय की बात को कहते हुए कहा कि मैं अपने घर में जबलपुर में था और मां 6 माह से बीमार और पलंग पर थी मैं मां को रोटी खिला रहा था अचानक गुरुदेव के यहां से संदेश आया अब कुछ त्याग दो और रामटेक पहुचो। मैंने बहुत सोचा की मां मां को कैसे बताऊं कि आपको खाना खिलाने का आज मेरा आखिरी दिन है। फिर भी मैंने मां को कहा कि गुरुदेव का आदेश आ गया है। कल से मैं आपको खाना नहीं खिला पाऊंगा। और और मां ने जवाब दिया वैराग्य की और अग्रसर हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
