यदि आपको क्षमा नहीं मांगनी है तो क्रोध ना करें मुनि श्री निर्लोभसागर महाराज
सागर
क्रोध ना करने की बात को कहते हुए मुनि श्री निर्लिभ सागर महाराज ने कहा की क्रोध आने पर दिमाग एवं बुद्धि भाग जाती है।
जब क्रोध की शुरुआत होती है तो क्रोध की शुरुआत है विवेक के कारण होती है लेकिन उसका पश्चाताप अंत में होता है। क्रोध जब आता है तो बुद्धि विवेक का दरवाजा बंद हो जाता है। यदि हमें किसी से क्षमा नहीं मांगनी है तो मत मांगे लेकिन क्रोध न करें। क्रोध के बाद जब राजीनामा होता है तो क्षमा के द्वारा ही होता है। बैर के के कारण ही प्राणी भव भव मे भटकता है।
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उन्होंने आगे कहा की लज्जा जिसके जीवन में होती है वह लोभ नही करता है, लज्जा नहीं आती है तो व्यक्ति लोभ से ग्रसित होता है और लोगों को चूसना शुरू कर देता है। जो भी गलत व्यक्ति होता है वह निर्लज्ज होता है। उनको किसी से कोई भय नहीं रहता है। व्यक्ति के जीवन में भय का प्रवेश तब होता है जब उसकी हिम्मत नहीं रहती है। जब व्यक्ति के जीवन में हिम्मत रहती है तो उसे भय नहीं होता है। जब भी व्यक्ति का दिमाग खराब होने लगता है तो उसका सत्यानाश शुरू हो जाता है। जो भी व्यक्ति सफल होता है वह अपने ब्रेन को बैलेंस करने वाला होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
