मनुष्य जन्म में पुरुषार्थ कर मोक्ष मार्ग की साधना करें। सम्यक दर्शन की आधारभूत नींव जड़ पर मोक्ष मार्ग की सुदृढ़ता होती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी केशव नगर आचार्य शांतिसागर भवन में प्रवचन में बताया कि
सम्यक दर्शन मोक्ष मार्ग की नींव जड़ है, उस जड़ के संबंध में हमारे अंतरंग में ऐसी भावना होना चाहिए भावना के बल पर सम्यक दर्शन रूपी जड़ और नीव को मजबूत बनाना चाहिए ।
आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि जिस प्रकार आप मकान बनाते समय मकान की नींव को मजबूत रखते हैं ,जिससे मकान लंबे समय तक टिका रहता है ।नीव मजबूत होने पर वृक्ष मजबूत होता है तब हमें फल प्राप्त होते हैं इसी प्रकार सम्यक दर्शन की आधारभूत नीव पर मोक्ष मार्ग की सुदृढ़ता खड़ी है।
आचार्य श्री ने आगे बताया कि आप संसार में चिरकाल से परिभ्रमण कर रहे हैं जिस पर्याय में जन्म लेते हैं उस शरीर को आप आत्मा समझते हैं और शरीर के छूटने पर शोक मनाते हैं ।चिरकाल के संसार परिभ्रमण के पश्चात पुण्य के उदय से मनुष्य जन्म मिला है मनुष्य जन्म में शक्ति और सामर्थ्य अनुसार तप त्याग संयम करना चाहिए क्योंकि मोक्ष का कारण एकमात्र मनुष्य भव ही है ।अन्य गति चाहे देव गति , नरक गति , तिर्यंत गति हो जब तक मनुष्य जन्म में दीक्षा नहीं लेंगे तब तक आप मोक्ष नहीं जा सकते ।मनुष्य जन्म में पुरुषार्थ को जागृत कर मोक्ष की साधना की जा सकती है
आचार्य श्री ने एक सूत्र के माध्यम से बताया कि आपको शरीर के प्रति निर्ममता होना चाहिए ,गुरु के प्रति विनय भाव होना चाहिए ,और शास्त्रों का स्वाध्याय करना चाहिए आपको शरीर के प्रति बहुत ममता है ,ममता ही कर्म बंघ कराती है। इसके लिए मोक्ष मार्ग को जानना और समझना बहुत जरूरी है।
डा. पी के जैन,राजेश पंचोलिया शांतिलाल कासलीवाल ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व उदयपुर के मुनि श्री चिन्मय सागर जी ने बताया कि आप भगवान से धन दौलत बेटा-बेटी आदि चाहते हैं भगवान वीतरागी है सब कुछ छोड़ कर उन्होंने दीक्षा ली है वह कुछ लेते भी नहीं है और देते भी नहीं है। भगवान और गुरु के पास कुछ भी नहीं है क्योंकि भगवान और गुरु सब कुछ छोड़कर पूज्य बने हैं, भगवान बने हैं भगवान राग द्वेष से रहित है जो उवज्जल परिणाम पूर्वक भक्ति करते हैं उसे कर्मों और भक्ति अनुसार फल प्राप्त होता है श्रद्धा सम्यक दर्शन का मूल है ।देव शास्त्र गुरु के प्रति श्रद्धा होना चाहिए जो भिखारी है वह भगवान से मांगता है और जो पूजन भक्ति प्रार्थना करता है वह पुजारी है।
दशा नरसिंहपुरा चेरिटेबल ट्रस्ट केशव नगर श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष घनपाल जेतावत एवम् आयड मंदिर चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष खूबीलाल चितोड़ा ने बताया
प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के
चित्र का अनावरण एवम् दीप प्रवज्जलन नवीन तरुण, गेंदालाल, विशाल चितोड़ा परिवार ने किया आचार्य शिरोमणि आचार्य वर्धमान सागर जी के चरण प्रक्षालन खूबीलाल राजेश,रचित चित्तौड़ा परिवार ने
शास्त्र जीवनघर जेतावत परिवार ने भेट किए। मंगलाचरण भावना शाह ने प्रस्तुत किया । ब्रह्मचारी गजू भैय्या एवम् कुंथु कुमार गणपतोत ट्रस्ट के मंत्री ने बताया, परंपरा के तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी का 36 वा समाधि दिवस 14 अप्रैल को दोपहर को केशव नगर में भक्ति भाव से मनाया जावेगा ।इस अवसर पर आचार्य श्री धर्म सागर मंडल विधान की पूजन की जावेगी शाम को प्रतिदिन श्री जी एवम् आचार्य श्री की आरती होती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
