श्री शान्तिवीरशिवधर्माजीत वर्द्धमान सुर्रिभ्यो नमः
दीक्षा भौतिक अवस्था का परिवर्तन है
दीक्षा आध्यात्मिक जीवन का प्रवेश द्वार है आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी

धामनोद
नोकरी करने से धर्म के संस्कार नही मिलते है। संयम से जीवन को सार्थक करने की भावना उत्पन्न होती है। इसके लिए उम्र नही देखी जाती है। जिनके जीवन मे भाव उठते हैं वह जीवन को समर्पित करते है। तीर्थंकर देवो को वैराग्य उत्पन्न होता है तो लौकांतिक देव अनुमोदना करते है। उसी प्रकार साधना दीदी ने आर्यिका दीक्षा लेने की भावना व्यक्त की है, आप सभी अनुमोदना कर रहे है। ऐसे कार्यक्रम से धर्म प्रभावना तथा औरों को भी प्रेरणा मिलती है।
यह प्रभावशाली ह्रदयस्पर्शी उदबोधन वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने महती धर्म सभा मे प्रकट किये। इसके पूर्व संघस्थ सनावद की बेटी, महेश्वर की बहू साधना दीदी ने आर्यिका दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ाया

आपने अपनी भावना व्यक्त कर कहा की आचार्य गुरुवर के श्री चरणों में बारंबार नमोस्तु समस्त संघ को नमोस्तु, वन्दामि, इच्छामि। मैं अपने को अत्यंत ही सौभाग्यशाली मानती हूं कि, जैन कुल में मेरा जन्म हुआ। धार्मिक पारिवारिक संस्कारों के बीज पल्लवित होकर, सांसारिक बंधनों के बाद मुक्ति रमा को वरने हेतु संसार समुद्र की वैतरणी को पार करने के लिए वात्सल्य वारिधि आचार्य गुरुवर श्री वर्धमान सागर जी जैसी नौका का सहारा मिला है। मेरा संसार में जन्म तो कई वर्षों पहले हो चुका है लेकिन मेरा वास्तविक रूप से जन्म लेने का अवसर अब आया है। जब मैं आज वैराग्य और संयम पथ पर आगे बढ़ने के लिए अपने गुरु विश्व वंदनीय पंचम पट्टा धीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के श्री चरणों में उनके द्वारा दीक्षित हो पाऊ। इस अभिलाषा के बाद बारंबार नमोस्तु करते हुए निवेदन करते हुए कहा गुरुवर मुझे दीक्षा की स्वीकृति प्रदान कीजिए। इस संसार समुद्र से पार हो सके, ऐसा आशीर्वाद प्रदान कीजिए नमोस्तु गुरुदेव नमोस्तु गुरुदेव।
धर्मसभा में मंगलाचरण श्रीमती प्रणति, प्रीति प्रधान,प्रीति, पीयूष, अंकिता, निकिता, सोना जैन ने किया
इसके पूर्व साधना दीदी एवम कंठाली परिवार द्वारा पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के चरणों का पद प्रक्षालन किया गया।
प्रथमाचार्य आचार्य श्री शांति सागर जी सहित, सभी पूर्वाचार्यो को अर्ध संघस्थ दीदियों परिजनों धामनोद, महेश्वर, बड़वाह, खंडवा, धार, इंदौर, सनावद, भोपाल,जयपुर समाज द्वारा अर्पित किया गया।साथ ही आचार् श्री की भव्य ऐतिहासिक पूजन की गई। जिसमे स्थापना जल चंदन अक्षत पुष्प दीप नैवेद्य धूप अर्ध अर्पित किया गया।
सेवा के लिए सम्मान किया गया
संघ में निस्वार्थ चिकित्सा सेवा भावी डॉ श्री देवेंद्र जैन इंदौर का शाल श्रीफल माला प्रतीक चिन्ह से स्वागत किया गया। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी ने धार्मिक ग्रंथ आशीर्वाद सहित उन्हें दिये। कार्यक्रम का का कुशल संचालन श्रीमती आरती एवम श्री अजय पंचोलिया इंदौर ने किया।
वैराग्य के पलो में सभी भावुक
दिनाक 22 अप्रैल 22 को दो प्रतिमा धारी संघस्थ साधना दीदी द्वारा आचार्य श्री को आर्यिका दीक्षा हेतु श्रीफल चढ़ा कर निवेदन किया गया। वैराग्य मयी पलो को देखकर जहाँ परिवार की आखों में खुशी के आंसू थे, वही अनेक की आँखे नम थी। सभी भावुक हो गए।
परिचय साधना दीदी
उल्लेखनीय है कि साधना दीदी के पिताजी ने भी आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी बने वही इनकी भतीज भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर आर्यिका श्री 105 महायशमती माताजी होकर संघस्थ है।
साधना दीदी ने वर्ष 2021 में 2 प्रतिमा के नियम आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से कोथली में लिए व वर्ष 2016 में पावागिरी ऊँन मध्यप्रदेश में पंच कल्याणक में तप कल्याणक के दिवस पर 5 वर्षो में संन्यास मार्ग पर चलने की भावना आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी समक्ष व्यक्त की थी विगत 2 वर्षों से संघ में शामिल है
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलित अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
