स्वर्णोंदय अतिशय क्षेत्र खजुराहो में बन रहे समवशरण, एव सहस्त्रकूट जिनालय के निर्माण में बिना किसी लोहे के उपयोग के इंटरलॉकिंग के द्वारा जोड़े जा रहे हैं पाषाण
खजुराहो
पर्यटक दृष्टि से खजुराहो को जाना जाता है लेकिन अब इसे धार्मिक दृष्टि से भी जाने जाने लगा है इस नगर की एक खास बात हम सभी के सामने रखने जा रहे हैं।
पूज्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज का वर्ष 2018 में खजुराहो में मंगल वर्षा योग संपन्न हुआ था। उसी उसी बेला में पूज्य आचार्य श्री की प्रेरणा एवं कुशल सानिध्य में इसी क्षेत्र के समीप समवशरण व सहस्त्रकूट जिनालय की नीव नो रत्नों एवम अष्टधातु को रखने के बाद पूज्य आचार्य श्री के निर्देश मार्गदर्शन के अनुरूप स्वर्णोंदय तीर्थ क्षेत्र न्यास, दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र खजुराहो के समस्त पदाधिकारियों द्वारा दोनों के निर्माण का कार्य अनवरत गति से जारी है।

मिली जानकारी अनुसार सहस्त्रकूट जिनालय ने भारीभरकम नीव के ऊपर अब आकार लेना शुरू कर लिया है। इसी के साथ समवशरण मंदिर की भारी नीव ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित होकर प्राचीन तकनीक के साथ पूर्णता की ओर हो गई है। अब प्लेटफार्म पर मंदिर बनाने की तैयारी का कार्य शुरू हो चुका है।
इस मंदिर के विषय में प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री केसी जैन बताते हैं कि जिनालय वास्तु शास्त्र के अनुरूप पंचायतन शैली में निर्मित हो रहा है। इसके साथ ही मंदिर में वह पाषाण लगाए गए हैं जो खुजराहो के चंदेल कालीन मंदिर में लगे हुए हैं। यहां बनने वाले मंदिर एशिया के भव्य मंदिरों में से एक होंगे। विस्तृत जानकारी देते हुए बताते हैं कि बन रहा समवशरण मंदिर गोलाकार होगा। और बहुमंजिला होगा। जिसमें तीर्थंकर भगवान महावीर की 1008 प्रतिमा स्थापित होंगी। इसकी एक गैलरी में खडगासन प्रतिमाएं, एवं दूसरी में पद्मासन प्रतिमाएं विराजमान होंगी। इस मंदिर में अद्भुत कारीगरी राजस्थान के कारीगरों द्वारा की जा रही है। इसकी खास बात यह है कि इस मंदिर में लोहे का उपयोग कहीं भी नहीं है साथ ही इसमें इंटरलॉक तकनीक के द्वारा पत्थरों को जोड़ा जा रहा है। इस मंदिर के चहूं तरफ जैन संस्कृति की झलक उकेरी जा रही है। जिसकी नक्काशी का काम शिल्पकारो द्वारा किया जा रहा है। बन रहे समोसरण मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा स्थापित होगी। मंदिर निर्माण की पूर्णता के बाद आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के सानिध्य में पंचकल्याणक महोत्सव होना संभावित है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
