मनुष्य जन्म प्राप्त करके आत्म हित करना चाहिए आचार्य कनक नंदी गुरुदेव
सागवाड़ा
योगेंद्र गिरी प्राकृतिक एकांत स्थल पर विराजमान सिद्धांत चक्रवर्ती वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी गुरुदेव ने अंतरराष्ट्रीय वेबीनार में मनुष्य जन्म की महानता तथा मानव का अर्थ बताया विजयलक्ष्मी जैन ने बताया की वेबीनार का प्रारंभ आचार्य श्री द्वारा रचित कविता आधुनिक पढ़ा लिखा बाबू है मन पर न जिसका काबू है इस कविता से मुनि श्री सुविज्ञ सागर जी द्वारा मंगलाचरण किया गया।
आचार्य श्री ने बताया कि मनुष्य जन्म प्राप्त करके आत्म हित करना चाहिए। आत्म उपलब्धि मनुष्य जन्म का लक्ष्य होना चाहिए। जो सतत मनन चिंतन करता है। वह मानव है। शरीर जड़ है परंतु चिंतन मानव की जेष्ठता है। मनसे जो निपुर्ण है वह मानव है। मानव मन से उत्कृष्ट प्राणी है जो उत्कृष्ट नहीं सोचेगा वहां मानव नही। तितली 5000 किलोमीटर उड़कर जाती है। मधुमक्खी मधु बनाती हैं वह मानव भी अभी तक नहीं बना पाया। विज्ञान में भी सिद्ध हो गया है कि मनुष्य जितना क्रूर दुष्ट निकृष्ट शेर चीता आदि हिसक प्राणी भी नहीं है।
यथार्थ मानव का परिचय बताते हुए आचार्य श्री ने कहा कि ज्ञान तप दान दया के बिना मनुष्य जीवन भार स्वरूप है। महापुरुषों की पूजा उनके गुणों को प्राप्त करने के लिए की जाती है। महापुरुष जिस पथ पर चलते हैं वह मोक्षपथ बन जाता है। मनुष्य आर्य है हम मनु की संतान है। जो हित अहित मे भेद ज्ञान रखता है वह मानव है। पशु भी सम्यक दृष्टि हो सकता है नारकी भी सम्यक दृष्टि हो सकता है। “धर्म पंथ साधे बिना नर निगोदिया / विकलत्रय समान” उत्कृष्ट कला कौशल मानव में है पशु व कीट पतंगे में भी कला है उनके परागकण के बिना हमें भोजन भी नहीं मिल सकता। मनुष्य से भी चतुर कीड़े मकोड़े होते हैं। चिड़िया मधुर गाना गाती है मानव की स्मरण शक्ति अवदान शक्ति श्रेष्ठ है। मननशील चिंतनशील प्रज्ञाशील मानव महान है। परम विज्ञान धर्म है। धर्म को समझने के लिए उच्चतम विज्ञान को समझना आवश्यक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
