कुंडलपुर में हथकरघा के निशुल्क प्रशिक्षण के बाद 200 घरों के अंदर निर्मित होने लगे हैं कपड़े स्वदेशीकरण स्वालंबन का बना एक उदाहरण

आचार्य श्री विद्यासाग़र महाराज

कुंडलपुर में हथकरघा के निशुल्क प्रशिक्षण के बाद 200 घरों के अंदर निर्मित होने लगे हैं कपड़े स्वदेशीकरण स्वालंबन का बना एक उदाहरण
कुंडलपुर
पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से निशुल्क हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र के द्वारा रोजगार सभी को मिलने लगा है अब लगभग 200 घरों के भीतर हथकरघा से निर्मित कपड़े बनने लगे हैं जो सचमुच स्वालंबन स्वदेशी करण की एक मिसाल है।

 

 

 

 

अब यहां पर चंदेरी, महेश्वर, बनारस जैसे हथकरघा केंद्र चल रहे हैं। जो आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की प्रेरणा मार्गदर्शन से ही संभव हो पाया है पूज्य गुरुदेव का सपना है की स्वदेशी करण अपनाएं जो कार्य रूप में परिणत होता दिखाई दे रहा है। कुंडलपुर तीर्थ में अलौकिक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा है और सिद्ध क्षेत्र है जिसके दर्शन करने अनेकों भक्त यहां पर आते हैं इस पावन क्षेत्र पर श्रमदान के माध्यम से अनेकों लोगों ने हथकरघा का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। जो निशुल्क हुआ है यहां से निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर प्रतिदिन कुंडलपुर के 200 घरों के युवा प्रतिदिन 400 से ₹500 कमा रहे हैं।

 

 

 

इस मुहिम का यह असर हुआ कि कई युवाओं ने तो अपने घर की ग्रहणीयों को भी यह प्रशिक्षण दे दिया है जो रोजगार का एक स्वर्णिम माध्यम बनकर सामने आया है। और घरों में निशुल्क हथकरधा भी पहुंच चुका है पति और पत्नी दोनों एक साथ काम करके और इसका प्रशिक्षण करने के उपरांत 30 से ₹40000 कमा लेते हैं। ग्रामीण अंचल की अर्थव्यवस्था का यह एक मॉडल के रूप में सामने आया है। इसका यह परिणाम हुआ है कि हमारी बहुमूल्य प्राचीन कला भी संरक्षित रह गई एवं गांव के अंदर रोजगार का एक अवसर भी प्राप्त हो गया।

पूज्य आचार्य श्री की प्रेरणा एवं उनकी कृतज्ञता निश्चित रूप से मानव जाति पर सदा सदा बनी रहेगी पूज्यश्री की प्रेरणा रही की युवा व्यसनो से लिप्त न हो गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो इसके लिए आचार्य श्री ने उच्च शिक्षित युवाओं को प्रेरणा दी जाए एवं ग्रामीण अंचल के युवाओं को इस कला को सिखाया जाए। कपड़ा बनाने की कला को सीख कर ग्रामीण युवा अपनी खेती के साथ-साथ कपड़ा भी बना सकेंगे ताकि इन्हें दो रोजगार मिल जावे। इसी को ध्यान में रखते हुए पूज्य श्री की प्रेरणा मार्गदर्शन से श्रमदान संस्था की स्थापना की गई। गांव के युवा इस केंद्र पर आकर प्रशिक्षण देकर जाते हैं और कुछ ही महीनों में यह कला वह सीख जाते हैं और उन्हें निशुल्क हथकरघा उपलब्ध कराया जाता है और घर में रहकर ही वह कपड़ा बुनाई कर लेते हैं।

 

 

आचार्य श्री ने कुछ समय पूर्व चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में हथकरघा में लगे हुए युवकों जिसमें कुंडलपुर से लगे मढिया टिकेत के युवा महेश वर्मन, मोहराई के रामरतन ढीमर, अशोकनगर के समीप कचनार गांव के कपिल सेन, गौरव सेन को हथकरघा प्रदान किया गया था। इसके पीछे आचार्य श्री की दूरदर्शिता है आचार्य श्री ने युवाओं के संबंध में इन नवयुवकों से कहा था कि आस पास जो भी युवा बिना किसी काम के घूम रहे हैं उन्हें यह हथकरघा सिखाओ। घर में महिलाओं को भी यह कार्य सिखाओ। उन्होंने एक बात पर और ध्यान देने को कहा कि यह ध्यान रखना कि इससे कमाई हुई राशि व्यसनो में न लगे। और इसका सही उपयोग करना।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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