आचार्य श्री सुबीर सागर महाराज की निश्रा में निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीरसागरजी महाराज के गृहस्थ अवस्था के पिता श्री शिखर चंद जैन नायक का सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण
नागपुर
ऐसे महान व्यक्तित्व जिन्होंने ऐसे रत्न को जन्म दिया जो आज धर्म की प्रभावना कर रहा है साधना संयम तप के चरम शिखर पर है पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री वीरसागरजी महाराज के गृहस्थ अवस्था के पिता श्री शिखर चंद जैन नायक का सल्लेखना पूर्वक आचार्य श्री सुवीर सागर महाराज के सानिध्य में सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण हो गया।
पूज्य आचार्य श्री ने उन्हें संबोधन दिया और उन्हें धर्म मार्ग पर लगाते हुए संसार की मोह माया को नश्वर बताया उन्हें समस्त प्रकार की आहार आदि का त्याग करवा दिया था निश्चित रूप से इन्होंने उत्तम मरण को प्राप्त किया है जीवन का अंतिम लक्ष्य यही होना चाहिए कि सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण होऔर वह भी साधु संत की निश्रा में वैसा ही इन्हें प्राप्त हुआ है ऐसे महान साधक के चरणों में हम कोटि-कोटि नमन करते हैं।
उत्तम श्रावक श्रेष्ठी श्री शिखरचंद जैन (नायक) ने अपने अहोभाग्य से आचार्य श्री सुवीरसागर जी महाराज के सानिध्य मे श्री शीतलनाथ जैन मंदिर ,ग्रेट नाग रोड ,नागपुर मे “सल्लेखना पूर्वक समाधि मरण रात्रि 1:35 बजे हुआ।
अंतिम यात्रा आज दिनांक 25 / 7 / 23 दिन मंगलवार को प्रातः 9:00 बजे श्री नागदा जैन मंदिर जी से गंगा बाई घाट जायेगी।
संकलित जानकारी अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
