वर्तमान के वर्धमान विद्यासागर तो तीर्थ उद्धारक ज्ञानमती माताजी:- आचार्य विनीत सागरकामां में द्वय सन्तो का अवतरण दिवस समारोह का हुआ आयोजन
कामा
वर्तमान के वर्धमान, सन्तो में प्रमुख व जिनधर्म की पताका को चहुओर फहराने वाले,अनेको ग्रंथो के रचियता के साथ साथ जीव दया के क्षेत्र में भी अतुलनीय कार्य के लिए जाने जाते हैं आचार्य विद्यासागर महाराज उसी प्रकार मांगीतुंगी में आदिनाथ भगवान की विशाल प्रतिमा के निर्माण के साथ साथ जम्बूद्वीप हस्तिनापुर ,अयोध्या जैसे तीर्थो के उद्धारक व अनेको विधानों की रचियता आर्यिका ज्ञानमती माताजी ने शरद पूर्णिमा को धरा पर जन्म लेकर जैन धर्म व दर्शन को बढ़ाने में अतुलनीय योगदान दिया है जिसे सदियों तक याद किया जाएगा।उक्त उद्गार कामा के विजय मति त्यागी आश्रम में आयोजित अवतरण समारोह में दिगंबर जैन आचार्य विनीत सागर महाराज ने व्यक्त किए।

वर्षायोग समिति के मंत्री संजय जैन सर्राफ ने बताया कि विजय मती त्यागी आश्रम कामां में शरद पूर्णिमा के अवसर पर संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज का 76 वां एवं गणिनी प्रमुख आर्यका ज्ञानमती माताजी का 88 वां अवतरण दिवस
समारोह आयोजित किया गया इस अवसर पर धर्म जागृति संस्थान के राष्ट्रीय प्रचार मंत्री संजय जैन बड़जात्या ने कहा कि शरद पूर्णिमा के पूर्ण चन्द्र की शीतलता में द्वय सन्तो गणिनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती व संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर ने जन्म लेकर सम्पूर्ण जैन समाज को शीतलता प्रदान की है उनके द्वारा जैन दर्शन व जैन धर्म को नई दिशा प्रदान की गई है जो भविष्य में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान नव दिवसीय जाप अनुष्ठान

समारोह के जापार्थियों को पुरस्कृत किया गया जिसमें प्रथम स्थान अंकित जैन सागर, द्वितीय स्थान श्रीमती उर्मिला जैन लहसरिया,

तृतीय स्थान श्रीमती रुकमणी जैन एवं चतुर्थ स्थान श्रीमती रजनी जैन ने प्राप्त किया। कार्यक्रम में नेहा जैन, अलका जैन, काव्य जैन, कोमल जैन,सार्थक जैन एवं श्रेयांश जैन नगर एवं प्रियंका जैन खेड़ली ने दोनो सन्तो के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन संजय जैन सर्राफ द्वारा किया गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
