आज बच्चो के उच्च शिक्षा के लिया भौतिक प्रबंध तो किया लेकिन संस्कारों का प्रबंधन नही विमर्श सागर महाराज
जतारा
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विमर्श सागर महाराज का उनकी जन्मस्थली जतारा में वर्षायोग हो रहा है।
उन्होंने अपने उद्बोधन में आज के शिक्षित व्यक्तियों में संस्कारों का अभाव बताते हुए कहा आज की जो शिक्षा है उसमे संस्कार बहुत ही कम लोगो मे शेष है। आज की वर्तमान परिस्थिति में घर परिवार में मन मुटाव, लड़ाई झगडे, तनाव माता पिता का बड़ो का सम्मान न करना प्रेम स्नेह में यानि जैसे अवगुण उच्च शिक्षा को निरर्थक करते हैं।
आज की शिक्षा पर करारी चोट करते हुए कहा की भौतिक शिक्षा की अंधी दौड़ में संस्कार बहुत पीछे रह गए हैं। आज बच्चों की उच्च भौतिक शिक्षा का त प्रबंध किया है, किन्तु
अच्छे संस्कारों का बच्चों के लिए कोई प्रबंध आज की भौतिक शिक्षा में नहीं।इसका कारण यह हुआ आजके व्यक्ति में वस्तु निर्माण की कला आ गईं लेकिन जीवन निर्माण की कला से विपरीत है। परिवार निर्माण, समाज निर्माण की कला से उसका परिचय नही है। इसी का कारण होता है तनाव झगड़ा जो व्यक्ति विनयशील नही उसकी उच्च शिक्षा भी निरथक है। विनयशील परिवार में सब सुखी रहते है।
उन्होंने कहा मैं कहता हूं कि आपकी वाणी, मन, चेष्टाओ के संस्कार यदि अच्छे होंगे तो आप दुनिया के सबसे सुंदर व्यक्तिव के धनी हो। उच्च शिक्षा के साथ जीवन में परिवार निर्माण की कला आपके परिवार में हो तो कभी झगड़े ना हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
