आर्यिका 105 श्री सुभग मति जी ने चारो प्रकार के आहार का त्याग कर यम सल्लेखना ग्रहण की।
उदयपुर
आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश
वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी अपने संयम जीवन का 55 वा चातुर्मास लेक सिटी उदयपुर में कर रहे है। आचार्य श्री से दीक्षित 80 वर्षीय शिष्या आर्यिका श्री सुभग मति माताजी ने निर्यापकाचार्य श्री वर्धमान सागर जी समक्ष यम सल्लेखना धारण की आचार्य श्री एवम् सभी साधुओं से क्षमा याचना कर दिनांक 14 जुलाई 2023 को चारों प्रकार के आहार का त्याग कर संस्तरारोहण धारण किया। इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवम समस्त साधु, चातुर्मास कमेटी के पदाधिकारियों सहित अनेक समाज जन भी उपस्थित रहे।
आर्यिका श्री सुभग मति जी का परिचय

श्रीमती घीसीबाई श्री चिरंजी लाल ठोलिया जोबनेर ने 80 वर्ष की उम्र में उदयपुर सेक्टर 11 संत भवन में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 15 मई 2023 को आर्यिका दीक्षा लेकर आ श्री सुभग मति नामकरण हुआ।इसके पूर्व आपने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 4 अगस्त 2022 को अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में दीक्षा लेकर क्षुल्लिका श्री शांत मति जी बनी।अनुकरणीय एवम् प्रशंसनीय है कि आपके पुत्र श्री सुरेश जी ने तथा पुत्र बधू श्रीमती चंद्र कांता ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 29 अप्रैल 2015 को किशनगढ़ में दीक्षा लेकर आर्यिका श्री विचक्षण मति जी एवम क्षुल्लक श्री विशाल सागर जी बने।जो वर्तमान में आचार्य श्री संघ में संघस्थ हैं।
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
