किसी दूसरे की बुराई में अपना समय जाया न करे अजीत सागर महाराज
सागर
जो कुछ भी आपके जीवन में होता रहता हैं वह सब आपके कर्मफल के कारण होता है।
भाग्योदय तीर्थ परिसर में अपनी वाणी के द्वारा कहा की अच्छे का स्वागत सभी कर लेते है लेकिन बुरे का स्वागत करना भी सीखना चाहिए।अच्छे का स्वागत तो सब करते हैं बुरे का भी स्वागत करना सीखो, अपने बारे में सोचना चाहिए किसी दूसरे की बुराई में समय जाया मत करो मुनि श्री अजीत सागर महाराज ने मूक माटी महाकाव्य पर अपने उद्बोधन में कहीं
मुनिश्री अजित सागर महाराज ने आचार्य श्री विद्यासागर
महाराज द्वारा लिखित मूकमाटीमहाकाव्य के स्वाध्याय में भाग्योदयतीर्थ में कही। किसी से यह भी मत कहना कि हमारे दिन खराब हैं खराब दिन भी कुछ दिन बाद निकल जाएंगे।
अच्छे दिन भी आएंगे।
उन्होंने फूल का उदाहरण देते कांटो से घिरे गुलाब को हम देखते है उसकी सुरक्षा हेत कांटे होते है।जैसे किसान खेत में बीज बोने के बाद बाढ़ लगा देता है ताकि उसक फसल की सुरक्षा हो सके। उसी प्रकार हमारे अंदर की विकृति और कालिस्ता दूर करने के लिए हमें अपना मन स्वस्थ रखना होगा। जिन का स्वभाव विकृति का होगा उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगेगा। जैसे मक्खी गंदगी पर बैठती है इसी प्रकार कुछ लोगों का स्वभाव
गंदगी की तरफ रहता है। जबकिभौरा कहां बैठता है भले गंदगी हो लेकिन वह कमल के फूल परजाकर के सुगंध रस लेता है। मुनिश्री ने कहा ज्ञानी और अज्ञानी का स्वभाव अलग अलग होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
