अनुशासन हीनता जैसी बीमारी दुसरी कोई नही प्रसन्नसागर महाराज
कुंजवन उदगांव
परम पूज्य अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर महाराज ने अनुशासन के विषय में प्रकाश डाला उन्होंने कहा जी
अनुशासन एक प्रभावी पुरस्कार लेकिन इसका प्रभाव पड़ता है जब स्वयं से प्रारंभ होता है। अन्यथा अनुशासन हीनता जैसी खतरनाक बीमारी दूसरी कोई नहीं..!
ध्यान आकृष्ट किया कि हम दूसरों को सुधारें,उससे पहले स्वयं को सुधारना बहुत जरूरी है। मार्मिक शब्दों में प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा की हर पिता अपने बेटे को राम जैसा देखना चाहता है लेकिन स्वयं रावण के कारनामों से ग्रसित है। कैसे परिवर्तन आयेगा-? कहा मैं जानता हूं एक युवक को*- वह अपने पिता से बोल रहा था कि पापा आप हमको एक घन्टे के लिये अपना मोबाइल दे दो। हम मम्मी के सामने आपका पूरा चिट्ठा खोल देंगे। पिता ने कहा- फालतू की बकवास मत कर।
उन्होंने सीख दी ध्यान रखना – हम दूसरों को जितना नियन्त्रित करेंगे वो उतना ही उच्छंकर हो जायेंगे। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है स्वयं अपनी मर्यादा की लक्ष्मण रेखा खींचे और उसके भीतर जीना शुरू करें। फिर देखो कैसे परिवर्तन आता है। वर्तमान की दशा के विषय में कहा आज के दौर में किसी को सुधारना या अनुशासन में रखना ऐसा ही जैसे बिन पानी के तैरना सीखना।तैरना सीखना है तो पानी में तो उतरना ही पड़ेगा।
जो हम बोलकर नहीं करवा पाते, वो हम मौन होकर करवा सकते हैं। घर, परिवार, समाज, देश, राष्ट्र और साधु समाज में हम यदि परिवर्तन चाहते हैं तो स्वयं से शुरुआत करो…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
