बच्चो को पाठशाला भेजोगे तो वे कभी मधुशाला नहीं जाएंगे और मुनि श्री अजीत सागर महाराज

धर्म

बच्चो को पाठशाला भेजोगे तो वे कभी मधुशाला नहीं जाएंगे और मुनि श्री अजीत सागर महाराज
सागर
वर्धमान कॉलोनी में शनिवार को आचार्य श्री विद्यासागर संस्कार केंद्र पाठशाला के वार्षिक उत्सव सातवां कलश स्थापना समारोह पूज्य मुनि श्री अजीत सागर महाराज सानिध्य में संपन्न हुआ। इस आयोजन में पाठशाला के बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देकर आयोजन को भक्तिमय बना दिया।

 

पूज्य मुनि श्री ने पाठशाला के बच्चों को संस्कृत करने पर जोर देने के आज के साथ कहा कि स्कूल कभी भी अच्छे समाज का निर्माण नहीं कर सकता। लेकिन पाठशाला पढ़ने से अच्छे और संस्कारित समाज का निर्माण बच्चे करते हैं। धर्म के प्रति आस्थावान बनते हैं। और समय निकालकर धर्म के बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा मंदिर बने या ना बने पाठशाला अवश्य बननी चाहिए। पाठशाला बनेगी बच्चे धार्मिक होंगे तो मंदिर भी बनेगा। पाठशाला के बच्चे कभी बिगड़ते नहीं हैं। बच्चों को पाठशाला भेजोगे तो वे कभी मधुशाला नहीं जाएंगे।

 

 

 

यह भी कहा कि पाठशाला का पड़ा बच्चा समाज को सही नेतृत्व दे सकता है। कितने भी बड़े बन जाओ अपने धर्म संस्कृति से कभी बड़े नहीं बन पाओगे। बच्चों के संस्कार पर जोर देते हुए कहा कि यदि बच्चों को संस्कार नहीं मिलेंगे तो वह बिगड़ेंगे। आज व्यक्ति के आचरण की कीमत है आचरण सुरक्षित है तो सब सुरक्षित है। और आचरण पाठशाला बनाती है।

 

पूज्य मुनि श्री निर्दोषसागर महाराज ने कहा कि हम पाठशाला को संस्कारशाला कह सकते हैं जिस प्रकार बच्चों को डांट फटकार कर कोचिंग भेजते हैं उसी तरह बच्चों को पाठशाला भेजें। भले ही बच्चों को डांट ना पड़े। यहां बच्चे संस्कारित होंगे और भविष्य में आपकी आज्ञा का पालन करेंगे। आज बच्चों की हालत यह है कि घर में कुछ कह रहे हैं।बाहर कुछ कर रहे हैं। पाठशाला में दान देने की शिक्षा भी दी जाती है। क्योंकि दान देने वाला कभी गरीब नहीं बनता है। बनिया बुद्धि का व्यक्ति नहीं हमें बढ़िया है बुद्धि का व्यक्ति बनना है। ज्ञान की जड़ कड़वी होती है लेकिन ज्ञान का फल मीठा होता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *