पुण्य शाली जीव संयम धारण मनुष्य जीवन सार्थक करते है
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर
संयम का जीवन में बहुत महत्व होता है , गुरुजन शरण में आए याचक भव्य आत्मा को याचना करने पर गुरु संयम धारण कराते हैं उस जीव का अतिशय पुण्य होता है जो जीव गुरु चरण पहुंचकर संयम की याचना करता है सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित धर्म सभा में आचार्य शिरोमणि वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने हूमड भवन में 34 वे आचार्य पदारोहण की गुणानुवाद सभा में संबोधन कर धर्म देशना में बताया।

गज्जू भैय्या राजेश पंचोलिया, पारस चितोड़ा अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि संसार के प्राणी आसक्ति विषय भोगों को लेकर असंयम की ओर दौड़ लगाते हैं ,पंच इंद्रिय स्पर्श रसना,घाण चक्षु कर्ण के कारण हर वस्तु का सेवन करते हैं, संसार अनंत है, विषय भोगों के कारण आप संसार में परिभ्रमण कर रहे हैं।मन बहुत चंचल है उस पर लगाम लगाना जरूरी है ।पंच इंद्रियों के विषय भोगों का निग्रह कर वास्तविक सुख प्राप्त किया जा सकता है ।आज गुणानुवाद संयमी जीवन का है ।गुरुओं का गुणानुवाद है आप सभी को असंयम से दूर रहना चाहिए असंयम विषय भोगों की ओर ले जाता है ।आचार्य शांतिसागर जी का भी संदेश था डरो मत संयम धारण करो। आप सभी धर्म के मर्म को समझें ।देव शास्त्र गुरु संत समागम से अपने जीवन को संयम धारण कर सार्थक करें।
आचार्य श्री प्रवचन के पूर्व आचार्य श्री के 34 वे आचार्य पदारोहण के उपलक्ष्य में श्रीमती शोभा पंचोलिया सनावद, आर्यिका श्री दिव्ययशमति,आ पद्मयशमति,आ श्री विश्व यश मति जी का संदेश,आ श्री देशना मति जी आ श्री दिव्यांशु मति जी आ श्री चैत्य मती जी आ श्री शुभमति जी ने अपनी विनयांजलि में आचार्य श्री से जुड़े अनेक संस्मरण भाव विभोर होकर प्रकट किए ।मंगलाचरण के पश्चात दीप प्रज्वलन श्रीमती शोभा पंचोलिया सनावद श्रद्धेय जैन बड़वाह, राजेश पंचोलिया इंदौर , शांति लाल वेलावत,देवेंद्र जी उदयपुर तथा अन्य समिति के पदाधिकारियों ने आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के चित्र का अनावरण कर दीप प्रवज्जलन कर अर्घ्य समर्पित किया।
शांतिलाल वेलावत, सुरेश चंद्र पद्मावत ,देवेंद्र जी गौरव गनोडिया ने बताया कि शनिवार 24 जून को टाउन हॉल नगर निगम प्रांगण उदयपुर में प्रबुद्ध जैन संस्थाएं, प्रोफेशनल फोरम सम्मेलन का आयोजन आचार्य श्री संघ के सानिध्य में किया गया ।जिसमें मुख्य वक्ता जतिन गांधी सहायक आयुक्त देवधाम विभाग ,कुशल जी कोठारी उप निर्देशक स्थानीय निकाय विभाग द्वारा सेमिनार को संबोधित कर मार्ग दर्शन दिया गया।

मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने सेमिनार को संबोधित कर बताया कि जैन लोग किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते दुनिया में एक भी व्यक्ति भिखारी नहीं है । सेमिनार की सार्थकता तभी होगी आज से ही आप लोग कदम बढ़ा कर जैन समाज के सहयोग की भावना करें ।प्रबुद्ध सम्मेलन में प्रबुद्ध धन, बुद्धि ,पद राजनीति ,बल, प्रशासन ,से होते हैं समाज सुधार की भावना तभी सार्थक होगी जब आप प्रतिदिन मंदिर जाकर साधर्मी के हाल-चाल जानने का प्रयास करेंगे।

आचार्य श्री ने संक्षिप्त आशीर्वचन में समाज के प्रबुद्ध जनों को यही संदेश दिया कि आप समाज के कमजोर कड़ी अंतिम पंक्ति में सा धर्मी की निस्वार्थ भावना से मदद करें जरूरतमंद की मदद कर समाज को उन्नत और आदर्श बनावे। दान इस प्रकार दिया जाता है कि दूसरे हाथ को भी पता नहीं लगता है अतः साधर्मी भाई के स्वाभिमान की रक्षा करते हुए उसकी मदद जरूर करना चाहिए।

आचार्य संघ के मंचासिन होने के बाद अतिथियो द्वारा चित्र अनावरण एवम दीप प्रवज्जलन किया।मंगलाचरण नृत्य से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ।शांतिलाल वेलावत ने स्वागत भाषण दिया।
जतिन गांधी ने समाज व्यक्ति एक दूसरे के पूरक है आपसी सहयोग जरूरी है। बिजनेस डाटा कलेक्शन बनाने का सुझाव दिया।अरुण माणोत ने शासकीय योजनाओं को समाज की अंतिम पंक्ति तक पहुंचाने स्वयं की कला निखारने जैन पोर्टल बनाने का विचार व्यक्त किया। सी ए प्रीतेश ने धार्मिक स्थलों को आयकर से छूट के लिए पंजीयन कराने की बात की।पारस सिंघवी उप महापौर ने समाज में तालमेल समाज के गरीब तबके की मदद के सुझाव दिया।
डा ज्योत्सना ने समाज में एक दूसरे को क्षमता अनुसार सहयोग की बात की। अमित जैन , आलोक जी कुशल जी कोठारी ने समाज को संगठित होने अपने निवास के आगे जैन के प्रतीकात्मक चिन्ह जय जिनेन्द्र जैन ध्वज आदि लगाने का सुझाव दिया।
25 जून रविवार को प्रातः 7 बजे से आचार्य शिरोमणी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की गुणानुवाद,विनयांजलि,सभा आमंत्रित अतिथियों के गौरव मय सानिध्य में होगी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
