धार्मिक संस्कार रूपी कवच से जीवन का निर्माण होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

धार्मिक संस्कार रूपी कवच से जीवन का निर्माण होता है
आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर

आज युवा शक्ति युवा सम्मेलन के अंतर्गत एकत्रित है। युवा यौवन का उम्र से संबंध नही होकर जिसमे जोश ऊर्जा है वह युवा है। उर्जा जोश से हर कार्य सफल होता है।

 

यह मंगल देशना आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर जी ने सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा हूमड़ भवन में 34 वे आचार्य पदारोहण के उपलक्ष्य में 6 दिवसीय गुणानुवाद की श्रंखला में तृतीय दिवस आयोजित युवा सेमिनार में प्रकट की। गजू भैय्या पारस चितोड़ा राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में उदाहरण देकर बताया कि 92 वर्षीय शांतिलाल जी भोजन उदयपुर उम्र से नहीं ऊर्जा से कार्य करते हैं,इसलिए वह भी युवा हैं। आज के युवा को धर्म और फल के प्रति गंभीर होना चाहिए।आपका दृष्टिकोण, लक्ष्य,स्पष्ट होना चाहिए ।सेवा के लिए त्याग करना होगा । यद्यपि जीवन में नौकरी आर्थिक और उच्च पद की चाहत से करते हैं।

 

आचार्य श्री ने कहा माता-पिता कर्ज लेकर विदेश में उच्च शिक्षा दिलाते हैं , अधिकांश बच्चे विदेश जाकर माता-पिता के उपकारों को भूल जाते हैं ।आप सभी को जेन होने का अभिमान होना चाहिए जिनत्व का मान रखना चाहिए ,धर्म के संस्कार जीवन में होना जरूरी है धर्म के संस्कार से इस भव में ही नहीं अनेक भव में इसका लाभ मिलता है। जैन धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है देव शास्त्र गुरु संत समागम से जीवन का संस्कार से निर्माण करना चाहिए जीवन का निर्माण संस्कार से होता है। सभी को बुराई और व्यसन से दूर रहना चाहिए
डॉक्टर वीरेंद्र हेगडे के विषय में
आचार्य श्री ने बताया कि डॉ वीरेंद्र जी हेगड़े धर्मस्थल ने 5 जिलों को गोद लेकर व्यसन मुक्त किया।

 

 

इसके पूर्व शिष्य युवा मुनि चिंतन सागर महाराज ने अपने चिंतन में बताया कि आपको अंतरंग और बहिरंग सात व्यसन के त्याग से सुख समृद्धि मिलेगी आज दुखद स्थिति है कि छोटे और बड़े की सोच परिवार में नहीं मिलती है समझने और समझाने के बजाय सभी को आपस में स्नेह बना कर रखना चाहिए आज भारतीय संस्कृति के स्थान पर पाश्चात्य संस्कृति से भारतीय युवाओं की क्षति हो रही है जैन धर्म के अच्छे संस्कार कवच का कार्य करेंगे उसके लिए परिवार के बड़ों को स्वयं संस्कारित होना चाहिए तभी वह परिवार को संस्कारित कर परिवार सुखी रहेगा

 

सफलता के पांच बिंदु
मुनि चिंतन सागर महराज ने सफलता के 5 बिंदु बताएं सभी के प्रति समता भाव रखें मनमुटाव नहीं करें सकारात्मक सोच रखें मेहनत करें ज्ञान उच्च पढ़ाई के माध्यम से प्राप्त करें और पुण्य से भाग्य का उदय होता है इसलिए अच्छे कार्य कर देव शास्त्र गुरु के सानिध्य में परिणाम को शुद्ध रखें तभी कषाय कम होगी
मंगलाचरण दीप प्रज्वलन चित्र अनावरण के पश्चात मास्टर ट्रेनर महावीर लिखमावत दिल्ली ने जोश के साथ अपनी बात प्रारंभ कर बताया कि उम्र कितनी भी हो वह महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण यह कि आप में कितनी ऊर्जा है कितना जोश है आपकी सोच सकारात्मक होना चाहिए जो पढ़े-लिखे माता-पिता की उपेक्षा करते हैं वह पढ़े लिखे अनपढ़ हैं यूथ युवा को मदद करना सीखना चाहिए संकुचित सोच मैं ,में अहम की प्रबलता होती है धर्म में दिखावा नहीं करना चाहिए

युवा विदेशी संस्कृति के पीछे भाग रहे हैं आपका लक्ष्य दूरदर्शिता का होना चाहिए आगामी कार्य योजना स्पष्ट और सकारात्मक होना चाहिए।
तपन मेघावत बांसवाड़ा ने अपने उद्बोधन में नशा माहौल संगति के कारण किया जाता है नशे का वातावरण घर परिवार में नहीं होता है आप की संगति क्या है उस पर निर्भर करता है इससे आर्थिक , मानसिक और शारीरिक क्षति होती है युवा शब्द का विश्लेषण कर इसका विपरीत वायु होता है युवकों को जोश और संस्कारित होना चाहिए फैशन की मानसिकता के कारण युवा और युवती नशा करते हैं लव जिहाद संस्कृति भारतीय संस्कृति के लिए खतरनाक है आपने युवाओं को पर्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण करने ,शासकीय योजनाओं का लाभ लेने और प्रतिदिन अभिषेक पूजन करने के लिए प्रेरित किया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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