भारत एक मंदिर है, क्योंकि यहां प्रत्येक नागरिकों के हृदय में अपने आराध्य प्रभु की प्रति आस्था श्रद्धा रहती है। भावसागर महाराज

धर्म

भारत एक मंदिर है, क्योंकि यहां प्रत्येक नागरिकों के हृदय में अपने आराध्य प्रभु की प्रति आस्था श्रद्धा रहती है। भावसागर महाराज
खिमलासा
महावीर दिगंबर जैन मंदिर में पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक चातुर्मास है। जिसमें ज्ञान, संयम, तप और सेवा इन चारों का योग है। जिसमें साधुओं के साथ साथ गृहस्थ को भी धर्म का अपूर्व अवसर प्राप्त होता है। साधुगण बहते पानी की तरह गतिशील रहते हैं लेकिन चातुर्मास के अवसर पर एक स्थान पर ठहरते हैं क्योंकि जीव रक्षा और आगमिक पद्धति का पालन करना है। इस अवसर पर श्रावकों को काफी धर्म लाभ मिल जाता है। नगर की धर्मशाला, पाठशाला इत्यादि प्रशस्त साधनों पर रहकर धर्म साधना और प्रभावना करते हैं। साधुओं का कर्तव्य है कि वे ज्ञान ध्यान तप में निरत रहे तो श्रावको के भी कर्तव्य है।आपके आठ माह कमाई में जाते हैं, मात्र चार माह धर्म के लिए मिले हैं तो क्यों ना इनका सदुपयोग करें।

 

 

महाराज श्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है, जिसमें आध्यात्मिक, योग साधनाओं को देखा जा सकता है। इस पावन भूमि पर ऐसे पुरुष देखने को मिलते हैं जो आध्यात्मिक साधना को महत्व देते हैं। इसलिए इस भारत भूमि को मंदिर का रूप कहा गया। भारत एक मंदिर है, क्योंकि यहां प्रत्येक नागरिकों के हृदय में अपने आराध्य प्रभु की प्रति आस्था श्रद्धा रहती है। इसलिए यह भारत भूमि एक मंदिर के समान है। अध्यात्म ही एक ऐसी वस्तु है जो व्यक्ति के जीवन में एक नया मोड़ ला देती है। लौकिक सुखों को छोड़कर आत्मिक सुख की ओर ले जाने वाला अध्यात्म होता है। जैन मुनियों का जीवन भी अध्यात्म की चरम सीमा से जुड़ा हुआ जीवन है। अपनी आत्मिक साधना में लीन रहना उनका प्रथम लक्ष्य होता है।

महाराज श्री ने कहा कि वर्षाकाल ही एक ऐसा काल है जिसमें अन्य कालों की अपेक्षा जीवो की उत्पत्ति अधिक मात्रा में होती है। अनेक प्रकार के जीव, जंतु, कीड़े, मकोड़े उत्पन्न हो जाते हैं। मार्ग में

 

 

 

हरियाली, हरी भरी घास से आच्छादित हो जाते हैं। उस हरी घास के आश्रित सूक्ष्म स्थूल दोनों प्रकार के जीव रहते हैं, उनके आवास इस वर्षाकाल बन जाते है। चारों तरफ वर्षा से भूमि आद्रतामय हो जाती है। ऐसे समय सूक्ष्म स्थूल जीवो की रक्षा के लिए एवं अहिंसा धर्म की रक्षा के लिए किसी तीर्थ क्षेत्र, गांव, नगर में रुक जाते हैं। इस दौरान अपनी-अपनी आत्मिक साधना करते हैं एवं सद्ग्रंथों का अध्ययन करते हुए उपवास, योग साधना करते हैं।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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