आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के 56 वे मुनिदीक्षा महोत्सव पर भावभीनी अभिव्यक्ति

धर्म

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के 56 वे मुनिदीक्षा महोत्सव पर भावभीनी अभिव्यक्ति

यह हम सभी के लिये गौरव और पुण्य के क्षण है जो हम महासंत आचार्य प्रवर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का 56 वा दीक्षा दिवस मना रहे है हम सभी के लिए कोटि कोटि पुण्य का उदय है जो ऐसे महातपस्वी संत के काल मे हम्रारा जन्म हुआ और उनके दर्शन उनकी वाणी सुनने का अवसर हमे मिल रहा है।

 

 

 

गुरुवर के प्रति भावाव्यक्ति

कुंदकुंद से दिगंबर ज्ञान समुन्दर होय
विद्यासागर वसुंधरा पर मेरे गुरुवर होय भू नभसे भी विशाल होकर सबको समा लिया सदाचरण से ऊँचे पहुचे हिमगिरी हरा दिया जैनधर्म की पावन गंगा जग पावन कर दो
विद्यासागर वसुंधरा पर मेरे गुरुवर होय
जिनशासन की स्वाति बूंद से बने आप मोती तेरे आगे चाँद सूर्य की फीकी है ज्योति ज्ञान सिन्धु को मथ कर पाया तुम जेसा कर दो
विद्यासागर वसुंधरा पर मेरे गुरुवर होय
कुंदकुंद से दिगंबर ज्ञान समुन्दर होय

 

 

शिष्य की गुरु के प्रति सच्ची सेवा का अनुपम उदाहरणपू

पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर ऐसे महासंत जिनका वर्णन शब्दों की सीमा को असीमित कर देता है पूज्य आचार्य श्री ने अपने गुरु ज्ञानसागर महाराज की जो सेवा की है वह सेवा शिष्य की गुरु के प्रति सच्ची सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है

बात उन क्षणों की है जब गुरुवर आचार्य श्री ज्ञानसागर महाराज को वृद्धावस्था एवं साइटिकासे रुग्ण शरीर हो गया उनकी सेवा मे पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज अडिग रहे चाहे वह कडकडाती सर्दी हो या तपती धूप, हो या झुलसाती ग्रीष्म की तपन,
इनकी सेवा आज भी अविस्मरणीय है, जो देश, समाज और मानव को दिशा बोध देने वाली है। डॉ. पन्नालाल साहित्याचार्य ने लिखा था कि 10 लाख की सम्पत्ति पाने वाला पुत्र भी जितनी माँ-बाप की सेवा नहीं कर सकता, उतनी तत्परता एवं तन्मयता पूर्वक आपने अपने गुरुवर की सेवा की थी।

धरती के साक्षात् भगवान आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
आचार्य श्री निर्मोही साधक है और रांग रंग से परे है 77 वर्ष की उम्र अपनी संयम साधना से च्युत नहीं है जन जन की आस्था का केंद्र है उनके भीतर प्राणी मात्र के प्रति कल्याण का भाव है जिसका जीता जागता उदाहरण है अनेक तीर्थों के कायाकल्प अस्पताल जेसे भाग्योदय तीर्थ पूर्णायु दयोदय गोशाला शिक्षा के लिए प्रतिभास्थली आदि जनकल्याणकारी कार्य पूज्य गुरुवर की प्रेरणा आशीष से संचालित है यू कहे की धरती के साक्षात् भगवान है।

पूज्य गुरुवर स्वदेशी करण पर ज़ोर देते है जिसे खुद देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी माना आत्मनिर्भर भारत की बात गुरुवर कहते है इंडिया नहीं भारत बोलो तभी इस देश का विकास संभव है हर कार्य हिंदी मे हो।

 

जिन्हे चरणों मे लगे हुए है उन चरणों का स्पर्शन
जिनकी प्रिय वाणी मे तत्वों का सुन्दरतम दर्शन
जिनके दर्शन से होता है तीर्थकर का शुभ दर्शन
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज को मेरा सो सो बार नमन

अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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