मानव शरीर मोक्ष प्राप्त करने का माध्यम है। आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
उदयपुर
चौरंगी दुनिया के जगत में चारों गतियों में आप अनंत काल से परिभ्रमण कर घूम रहे हैं ,।धर्म के प्रति श्रद्धा और आस्था होना चाहिए ऐसे भव्य मनुष्य जीव होते हैं ,जो देव शास्त्र गुरु के प्रति आस्था रखते हैं ।जैन आगम में 7 तत्व कहे गए हैं श्रद्धावान, विवेकवान और क्रियावान श्रावक बनकर सम्यक दर्शन प्राप्त करना जरूरी है ।

यह मंगल देशना वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर महाराज ने दशा हुमड धर्मशाला उदयपुर में व्यक्त की। गजू भैय्या राजेश पंचोलिया पारस चितोड़ा अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि जो सात तत्वों में मन वचन काय से लीन हो जाते हैं उन्हें सम्यक दर्शन प्राप्त हो सकता है ।
आचार्य श्री ने बताया कि आर्य खंड के भरत क्षेत्र में तीर्थंकरों के जैन कुल में आप ने जन्म लिया है यहां आप देव शास्त्र गुरु धर्म की भक्ति कर सात तत्वों को समझ कर यह जानने का प्रयास करें मैं कौन हूं।

मैं कौन हूं का आशय लौकिक नहीं होकर आध्यात्मिक आशय है। यह उत्तर जानने का मनन चिंतन करें ,इसके लिए शास्त्र स्वाध्याय जरूरी है ,इसके माध्यम से आपको आपके प्रश्न का उत्तर मिलेगा । भगवान की वाणी सुनने, गुरुदेव का सानिध्य पाकर आप सत्व सात तत्व रूपी सतरंगी दुनिया में सम्यक दर्शन प्राप्त करने का पुरुषार्थ करें।मानव शरीर मोक्ष प्राप्त करने का साधन है इससे गुरुओं की चर्चा विनयाजलि गुणानुवाद के साथ उनके चरणों का अनुयायी बनने का प्रयास कर चरण के साथ आचरण को आत्म सात कर मनुष्य जीवन सार्थक करें।

इसके पूर्व आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व संघस्थ माताजी श्रावको ने विनयांजली प्रस्तुत की ।क्षु श्री विशाल सागर महाराज ने बताया कि हमारे पूर्व पूर्व गृहस्थ अवस्था के 3 सदस्य आचार्य श्री से दीक्षित है।आर्यिका 105 श्री निर्मोहमति माताजी ने बताया कि मुझे आचार्य श्री की मुनि दीक्षा 7 वर्ष की उम्र में देखने का सौभाग्य मिला। उन्होंने गुरु को वैद्य, इंजीनियर,
वकील, शिल्पी की उपमा दी । आयिका 105श्री दर्शनामति माताजी ने बताया कि सनावद से 17 साधु हुए उसका असर बड़वाह पर भी हुआ यहां से भी चार साधु में हमें भी दीक्षा का अवसर मिला । हर व्यक्ति के जीवन में गुरु जरूर होना चाहिए। आर्यिका 105 श्री विनम्रमति माताजी की तेरहवी संतान के रूप में जन्मे मुनि श्री को 13 चरित्र का धारक निरूपित किया आर्यिका 105 श्री निर्मुक्त मति माताजी ने कहा कि गुरु का गुणगान करना सूर्य को दीपक दिखाने बराबर है ।आचार्य श्री अमीर गरीब छोटे बड़े सबको एक जैसा आशीर्वाद देते हैं।
आर्यिका 105 श्री विचक्षणमति माताजी ने जन्म दात्री माता की धैर्य सहनशीलता की प्रशंसा कर उनके बचपन के सपने का उल्लेख किया जिसमें बच्चे को नदी में डूबते हुए उन्होंने देखा, फिर बाद में बच्चा तेर कर किनारे सुरक्षित लग गया।
धर्म सभा में राजेश पंचोलिया इंदौर में आचार्य श्री के अनेक संस्करण बता कर बताया कि सनावद से 17 साधु हुए हैं जिसमें आचार्य श्री पंचोलिया परिवार के प्रथम साधु होकर पंचोलिया परिवार में 6 साधु हुए।नेत्र ज्योति का प्रसंग आपने सभा में बताया। श्री प्रकाश सिंघवी ने आचार्य धर्म सागर जी अभिनंदन ग्रंथ का उल्लेख कर बताया कि आचार्य धर्म सागर जी ने ग्रंथ को स्पर्श भी नहीं किया।सुंदरलाल डागरिया रोशनलाल गदावत आदि अनेक वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट कर आचार्य श्री के प्रति भावांजलि प्रस्तुत की।
मंगलाचरण के बाद आचार्य श्री शांति सागर महाराज के चित्र अनावरण झमकलाल अखावत रोशन लाल गदावत, राजेंद्र कोठारी, अशोक शाह,भंवर लाल आदि द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया ।आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन का सौभाग्य ओंकार लाल हपावत परिवार को जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य बृजलाल खलुड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रकाश सिंघवी द्वारा किया गया आज उदयपुर के अनेक उपनगर की समाज द्वारा चातुर्मास स्थापना का निवेदन किया।
मंगलवार से होगी 34 वे आचार्य पदारोहण कार्यक्रम की शुरुआत
आचार्य शिरोमणी वात्सल्य वारिघि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के 34 वे आचार्य पदारोहण के कार्यक्रम सकल दिगंबर जैन समाज आयोजित कार्यक्रम मंगलवार प्रातः से प्रारंभ होगे।
ध्वजारोहण सुरेश पद्मावत परिवार द्वारा तथा मुख्य मंगल कलश की स्थापना शांतिलाल कमलेश,दिनेश, हेमंत वेलावत परिवार द्वारा की जावेगी।
प्रातः मंगलाचरण, चित्र अनावरण,दीप प्रवज्जलन आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन,जिनवाणी भेट की जावेगी।विनयांजली सभा के पश्चात आचार्य श्री के मंगल उपदेश होगे। दोपहर को 34 मंडल विधान का आयोजन होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
