आपकी तरह आत्मा भी कर्मों से स्वतंत्रता चाहती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

आपकी तरह आत्मा भी कर्मों से स्वतंत्रता चाहती है।आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
उदयपुर
आचार्य शिरोमणी श्री वर्धमान सागर महाराज संतोष नगर में संघ सहित विराजित हैं आज प्रवचन में आचार्य श्री ने बताया कि सभी लोग कर्मों के कारण दुख पाते हैं आपके परिवार के सदस्य जैसा आप चाहते हैं वैसा आपके अनुसार रहना नहीं चाहते। क्योंकि उन्हें परतंत्रता लगती है वह स्वतंत्र रहना चाहते हैं परतंत्रता से दुख होता है । सारा संसार परतंत्र है । जैसे आप स्वतंत्र रहना किसी के नियंत्रण में नहीं रहना चाहते ,उसी प्रकार आपकी आत्मा भी कर्मो से स्वतंत्र होना चाहती है।

 

 

 

ब्रह्मचारी गजू भैय्या ,राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि,आत्मा की स्वतंत्रता के लिए आपको देव ,शास्त्र ,गुरुओं, संत समागम ,संयम तप धर्म का सहारा लेकर अपने भाव परिणाम ठीक करना होगे।भाव ठीक होने से भव सुधरता है। विश्व में 2 विश्व युद्ध के दुष्परिणाम के बारे में आचार्य श्री ने चिंता व्यक्त की।

 

 

 

पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सानिध्य में रविवार को श्री 1008 श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर संतोष नगर में दोपहर 1 बजे कल्याण मंदिर विधान का आयोजन होगा। श्री पारस नाथ कल्याण मंदिर विधान में भगवान का गुणानुवाद किया जाएगा।
आचार्य श्री ने आगे बताया कि हमारे भाव परिणाम पल-पल क्षण क्षण में परिवर्तनशील होते हैं इस कारण हम हर समय दुखी रहते हैं हमारी कल्पना के अनुसार हम पदार्थों में सुख खोजते हैं ,सुख नहीं मिलने पर दुखी होते हैं। प्रत्येक प्राणी अपने भवन में मकान में सुख का अनुभव करता है किंतु घर सास्वत नहीं है संसार की वर्तमान स्थिति पर आचार्य श्री ने बताया कि कर्म के निमित्त सुख नहीं मिला तो आप दुखी हैं जो संपत्ति धन आपने अर्जित किया है इसे धर्म कार्यों में लगाने से पुण्य का अर्जन कर सकते हैं भारत तीर्थंकरों संत महात्माओं का देश है यहां जो धर्म धारण करते हैं वह सुखी हैं ।श्री पारसनाथ भगवान के गुणों का वर्णन विधान में होगा भगवान पार्श्वनाथ ने भी सुख और दुख दोनों का अनुभव किया है जीवन में धर्म से पुण्य मिलेगा तभी मानव परम सुखी होगा।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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