गुरु शिष्य का ऐतिहासिक महामिलन मुनि श्री आज्ञा सागर महाराज ने आचार्य श्री कनकनंद जी महाराज को साष्टांग नमस्कार कर 3 प्रदक्षिणा देकर नमोस्तु कर आशीष लिया
सागवाड़ा
शनिवार की प्रातः बेला एक अलौकिक क्षण को लेकर आई जब गुरु और शिष्य का महामिलन देखने को मिला यह क्षण अपने आप में शिष्य का गुरु के प्रति विनम्रता और श्रद्धा को प्रकट करता है जो अपने आप में सभी के लिए प्रेरणास्पद है।
यह क्षण थे जब पूज्य मुनि श्री आज्ञा सागर महाराज संघ का शनिवार की प्रातः बेला में योगेंद्र गिरी के लिए विहार हुआ 6:00 बजे गुरु शिष्य का मिलन हुआ। वहां पर पूज्यश्री ने अपने गुरु कनकनंदी महाराज के दर्शन होते ही साष्टांग नमस्कार करके 3 प्रदक्षिणा लगाकर गुरुदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया।
मौजूद समुदाय भाव विहल होकर इन दृश्यों को देख रहा था।और एक अलौकिक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे थे कि पंचम काल में भी आज विनय संपन्नता और गुरु के प्रति शिष्य का कितना समर्पण होता है।
आचार्य कनकनंदी गुरुदेव का आज्ञा सागर जी सुविज्ञ सागर अध्यात्म नंदी सभी माताजी की उपस्थिति में पाद प्रक्षालन किया गया। गुरुदेव की पूजन की।
इन पलो में अपने प्रियाग्र शिष्य के स्वागत हेतु स्वयं आचार्य श्री भी तीर्थ क्षेत्र परिसर के बाहर तक पधारे तो आचार्य श्री के संघस्थ मुनि भगवंत व माताजी दूर तक विनय पूर्वक लेने के लिए भी पधारे।
एक आचार्य का अपने छोटे साधक के प्रति मिसाल देखनी हो तो आचार्य कनकनदी जी महाराज और आज्ञा सागर महाराज का महामिलन है मुनि श्री सुविज्ञ सागर महाराज
इस अवसर पर मुनिश्री सुविज्ञ सागर महाराज ने कहा की एक गुरु या बड़े आचार्य के प्रति विनय और एक आचार्य का अपने से छोटे साधक के प्रति भी सम्मान की आगमनुसार मिसाल देखनी हो तो वो आचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज व मुनि श्री आज्ञा सागर जी गुरुदेव का मिलन है।
एक रोचक जानकारी
जब आचार्य श्री देवनंदी जी,आचार्य श्री पद्मनंदी जी व आचार्य श्री गुप्ति नंदी जी महाराज भी जब अपने शिक्षा गुरु वैज्ञानिक धर्माचार्य श्री कनकनंदी जी गुरुराज से मिलन होता है तो इसी तरह साष्टांग दंडवत नमस्कार करते है और गुरुदेव श्री कनकनंदी जी भी अपने शिष्य सम लघु भ्रताओ का हमेशा ऐसा सत्कार करते है।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
