मुनि श्री समतासागर महाराज संघ एवम प्रशमसागर महाराज संघ का हुआ मंगल मिलन

धर्म

मुनि श्री समतासागर महाराज संघ एवम प्रशमसागर महाराज संघ का हुआ मंगल मिलन
सिलवानी
सिलवानी की पावन धरा मंगलमय हो गई जब दो मुनि संघ का महामिलन इस पावन धरा पर हुआ।संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर ज महाराज के परम शिष्य वात्सल्य मूर्ति निर्यापक श्रमण मुनि श्री108 समतासागर महाराज,मुनि श्री 108महासागर महाराज,मुनि श्री 108 निष्कंपसागर महाराज,ऐलक श्री 105निश्चयसागर महाराज ससंघ का सिलवानी नगर में भव्य आगमन हुआ समाजजन ने मुनिसंघ की मंगल आगवानी की।

 

 

 

 

वही इस धरा पर महामिलन हुआ। जो विनय संपन्नता का एक अलौकिक उदाहरण प्रस्तुत कर रही थी नगर में विराजित आचार्य श्री 10 विशुद्धसागर महाराज के परम शिष्य मुनि श्री 108 प्रशमसागर महाराज, मुनि श्री 108 साध्यसागर महाराज का महामिलन हुआ।

भक्तों की अपार समूह के बीच यह महामिलन ऐतिहासिक व स्वर्णिम हो गया संपूर्ण नगर इस महामिलन मंगल अगवानी में सम्मिलित रहा ऐसी अभूतपूर्व अगवानी ऐसा महामिलन होने से सिलवानी की धरती व नगर जन अपने आपको धन्य मान रहे थे। जब पूर्व में विराजित मुनि संघ ने पूज्य मुनि श्री समता सागर महाराज के चरणों में झुककर नमोस्तु निवेदित किया तो जय जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। मुनि संघ ने पूज्य मुनि श्री की परिक्रमा की ऐसा क्षण श्रमण परंपरा के इतिहास में सदा अविस्मरणीय रहेगा। जैन धर्म की ध्वज पताका वह अपार भक्तों के जनसमूह के बीच समस्त मुनि संघ को जिनालय लाया गया। जहां श्रद्धा आस्था का सैलाब देखने को मिला इस पुनीत अवसर पर मंगल प्रवचन भी हुए।

वही संध्या की बेला में पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समता सागर महाराज सिलवानी नगर से बम्होरी की और मंगल विहार हुआ।

ऋषि भया से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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