मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी का हुआ पपौरा तीर्थ पर प्रवेश मुनि श्री ने पपौरा की पुरानी स्मृति को ताजा किया

धर्म

मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी का हुआ पपौरा तीर्थ पर प्रवेश
मुनि श्री ने पपौरा की पुरानी स्मृति को ताजा किया

पपौरा जी
विश्व वंदनीय आचार्य प्रवर 108 विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सुधा सागर महाराज का संघ सहित पपौरा तीर्थ मंगल आगमन हुआ पूज्य श्री पृथ्वीपुर की ओर अपने कदम बढ़ा रहे है।

 

 

 

पूज्यश्री ने पपौरा जी तीर्थ पर अपने मांगलिक उद्बोधन मे पपौरा जी की अपनी पुरानी स्मृति को ताजा करते हुए सभी के समक्ष बयां किया। महाराज श्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि किसी भी कार्य का हो जाना और कर लेना दोनों में बहुत अंतर है। महरौनी से इतना लम्बा चलकर आये है तो पपौरा जी तीर्थ के दर्शन मिल रहें हैं। पपौरा जी को देख कर मैं सोच रहा था कि यहां तो बहुत बड़ा गेट था अभी जव जिज्ञासा के लिए आये तो पता चला सब कुछ याद है, वहां से जाकर पांच नम्बर मन्दिर में हम बैठते थे, उससे थोड़े आगे रथ रहता था, उससे थोड़े आगे वाले मन्दिर में आचार्य श्री बैठते थे।

 

 

क्षेत्र का द्वार भी बदल गया। क्षेत्र की माटी में कुछ ना कुछ होता है तब ही तो कदम अपने आप आगे बढ़ते चले जाते हैं। पपौरा जी बहुत प्राचीन क्षेत्र है आचार्य श्री यहां रहे उनके साथ यहां रूके थे आज योग बना और इस तीर्थ पर आना हो गया। ऐसी बात नहीं है सभी क्षेत्रों की अपनी अपनी विशेषताएं होती है।

 

 

मध्यप्रदेश महासभा के संयोजक विजय धुर्रा ने बताया परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज क्षुल्लक श्री गंभीर सागर महाराज ससंघ ने मंगलवार प्रातः काल की बेला में टोल प्लाजा से सत्रह किलोमीटर लगभग पद विहार कर अतिशय क्षेत्र पपौरा जी जिला टीकमगढ़ में प्रवेश किया जहां क्षेत्र कमेटी के साथ ही टीकमगढ़ जैन समाज ने मुनि संघ की अगवानी की इस दौरान पार्षद राजीव वर्धमान बाबा नायक गजेन्द्र कुमार लुइस सहित अन्य भक्तों ने मुनि श्री को पपौरा तीर्थ पहुंच कर श्री फल भेंट किए।

शगुन का अपना महत्व होता है ये संकेत कहलाते हैं
उन्होंने कहा कि शगुन का अपना महत्व होता है शगुन एक संकेत है पूज्य आचार्य गुरुवर ने मूकमाटी में लिखा है बाएं हिरण दाये, घर जाये लंका जीत राम घर आये ।इसका मतलब जब बाएं ओर से निकल कर आपके आगे से हिरणों का झुंड दाये ओर के लिए निकलने लगता है तो आपकी विजय निश्चित है ये शगुन कहलाता हैं। इनका अपना महत्व होता है ये हमें संकेत देते हैं हम किसी चीज को नकार नहीं सकते हमे सभी चीजों के महत्व को समझा चाहिए।

 

 

उन्होंने कहा कि एक मकान बनाने में सबसे ज़्यादा महत्व दीवार का होता है या नीव का या छत का सभी अपना महत्व होता है यदि मकान पर छत ना हो तो मकान अधूरा है बगेर नीव के मकान ठहर नहीं सकता तो एक चीज को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं मान सकते इसी प्रकार जीवन सभी का अपना महत्व होता है एक बिंदु पर आप रूककर नहीं रह सकते।

उन्होंने शाहगढ का संस्मरण सुनाते हुए कहा कि हमारे आचार्य श्री कई बार आकस्मिक बोल देते हैं पहले से कोई तैयारी नहीं करते, सबसे पहले शाहगढ में पहला प्रवचन हुआ था आचार्य श्री कहते हैं कि प्रवचन के लिए कभी पढ़ना नहीं जो पढ़ा है,उसी से प्रवचन कर देना प्रवचन के लिए कभी तैयारी मत करना जो तैयारी है उसी से ही उपदेश दे देना।।

 

उन्होंने कहा कि जो जो धार्मिक क्रिया आप अपनी शक्ति कम होने के कारण नहीं कर सकते वे किसी एक व्यक्ति को प्रेरित करें कार्य करवाए, तुम मुनि नहीं बन सकते लेकिन पुरी शक्ति लगा कर एक मुनि एलराज को बनाये आप मन्दिर नहीं बना सकते किसी को प्रेरित करके मन्दिर बनवा देना तुम रात्रि भोजन का त्याग नहीं कर सकते तो किसी को प्रेरित करके उससे रात्रि भोजन छूड़वा देना और कुछ नहीं कर सकते तो जो मन्दिर बनाये उसे जय जिनेन्द्र कर लेना। आप मन्दिर नहीं बना सकते तो एक ईट लगा देना वो ईट तुम्हारे लिए एंटीना का काम करेगी। सुख में जो बटवारा करें उसके दुःख कभी आयेगा ही नहीं, आप विवाह आदि करते हैं तो सभी चाहने वालों को क्यों बुलाते आज मेरे घर में खुशी है, दुःख में बुलाया नहीं जाता। घर के आगे पुरा गांव इकट्ठा हो जाता है ।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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