जिस प्रकार विश्व प्रसिद्ध श्रीश्रवणबेलगोला किसी परिचय का मोहताज नही है, उसी प्रकार जैन मठ श्रवण बेलगोला के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी स्वामी भी जग प्रसिद्ध है।

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जिस प्रकार विश्व प्रसिद्ध श्रीश्रवणबेलगोला किसी परिचय का मोहताज नही है, उसी प्रकार जैन मठ श्रवण बेलगोला के भट्टारक श्री चारुकीर्ति जी स्वामी भी जग प्रसिद्ध है।

उनके जीवन कृतित्व पर एक नजर
पूज्य श्री का जन्म 3 मई 1949 को सिद्धक्षेत्र श्री वारंगाजी मे श्रीमती कांते श्रीचंद्र राज जी के यहाँ एक होनहार बालक का जन्म हुआ उनका नाम श्री रत्नवर्मा रखा गया।

इनके जीवन की विशालता बहुत उन्नत थी जब यह 16 वर्ष की उम्र में हुमचा मठ में अध्ययनरत थे, तब जैन मठ श्री श्रवणबेलगोला में भट्टारक श्री भट्टाकलंक स्वामी की रत्न पारखी निगाहों ने निर्दोष कुल स्वभाव शिक्षा, आचरण,आयु, स्वाध्याय, शारीरिक लक्षण, हस्तरेखा, बुद्धि परीक्षण कर जैन मठ श्री श्रवण बेलगोला के भावी भट्टारक के रूप में चयन कर 12 दिसम्बर 1969 को जैन मठ का उत्तराधिकारी भट्टारक धोषित किया इनके द्वारा लिखित मनोनयन का कर्नाटक शासन ने अनुमोदन किया।

 

 

 

 

 

 

4 माह बाद 19 अप्रैल 1970 श्री महावीर जयंती के पुनीत पर जैन मठ श्रवणबेलगोला का भट्टारक नियुक्त कर श्री चारुकीर्ति जी स्वामी नामकरण पश्चात प्रथम पट्टाभिषेक हुआ जिसमें अनेक भट्टारक स्वामी तथा कर्नाटक शासन ने रजत मुद्रा चांदी की सील भेंट की गई। पूज्य श्री चारुकीर्ति जी स्वामी देश में ही नही विदेशों में भी जैन धर्म का प्रचार किया जिसका जैन जगत सदा ऋणी है। उन्होंने जैन धर्म के प्रचार के लिए वर्ष 1976 में सिंगापुर तथा वर्ष 1979 में अमेरिका की विदेश यात्रा की।

 

रोचक जानकारी
सन 1967 के बाद 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक 1979 में होना था। श्री बाहुबली भगवान की प्रतिमा 981 में निर्मित होने से सन 1981 में 1000 वर्ष पूर्ण होने से 12 वर्षीय कार्यक्रम वर्ष 1981 में बृहद स्तर पर मनाने का निर्णय लिया। सन 1981में श्री बाहुबली भगवान का 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक आचार्य श्री 108 दे देशभूषणजी महाराज, आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज, ऐलाचार्य 108 श्री विद्यानंदीजी महाराज सहित 149 साधुओ का पावन सानिध्य मिला।

 

इस आयोजन में उपस्थित तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भट्टारक स्वामी जी को कर्मयोगी की उपाधि से अलंकृत किया था।

   

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती 108 आचार्य श्री शांति सागर जी की अक्षुण्ण पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्द्धमान सागर जी महाराज को वर्ष 1993 के 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक कार्यक्रम में प्रमुख सानिध्य एवम निर्देशन के लिए गुजरात मे श्रीफल भेंट कर आमंत्रित किया गया। श्री बाहुबली भगवान का 12 वर्षीय महामस्तकाभिषेक सन 1993, सन 2006, सन 2018 का महामस्तकाभिषेक पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी सहित 35 आचार्यो सहित 400 साधुओ के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। जिसमे भारत सरकार के राष्ट्रपति महोदय, प्रधानमंत्री महोदय, कर्नाटक के मुख्यमंत्री, कर्नाटक सरकार राज्यपाल, गृहमंत्री, भारत सरकार सहित अनेक राजनेता उपस्थित हुए थे।

आपको बता दे श्री भट्टारक स्वामी जी का प्रति 10 वर्षो में महावीर जयंती पर पट्टाभिषेक कार्यक्रम होता है। वर्ष 2020 में महावीर जयंती पर भट्टारक पद के 50 वर्ष पूर्ण होने पर श्री श्रवणबैलगोला व में उपस्थित साधुओ के सानिध्य में सादगी पूर्ण रूप में मनाया गया।

 


श्री चारुकीर्ति जी भट्टारक स्वामी के पावन निर्देशन में श्री बाहुबली भगवान का 12 वर्षीय मस्तकाभिषेक वर्ष 1981, 1993, 2006, तथा वर्ष 2018 में भव्य रूप में सुनियोजित आगम परम्परा अनुसार संपन्न हुआ था।। ऐसे महान व्यक्तित्व का यू ही चले जाना जैन जगत एवम मानव जगत के लिए एक अपूर्णीय क्षति है। उनका योगदान सदा सदा अविस्मरणीय रहेगा। उन्होंने एक स्वर्णिम अध्याय को लिखा।

ऐसे महान व्यक्तित्व के चरणो में कोटिश नमन
राजेश पंचोलिया
सनावद इंदौर
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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