विश्व का प्रथम नंदीश्वर द्वीप एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ के सानिध्य में 25 जून से प्रारंभ होगा

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विश्व का प्रथम नंदीश्वर द्वीप एवं सिद्धचक्र महामंडल विधान मुनि श्री विमल सागर महाराज संघ के सानिध्य में 25 जून से प्रारंभ होगा
घाटोल

वासुपूज्य दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में होने वाले 8 दिवसीय विधान आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि विमल सागर, अनंत सागर, धर्म सागर एवं भाव सागर जी महाराज के सानिध्य में होने वाले इस महामंडल विधान की संपूर्ण तैयारी को अंतिम रूप दिया गया जहां 25 जून से 3 जुलाई तक इस विधान के अंतर्गत विश्व की प्रथम रजत जिनालय कि 52 वेदी की प्रतिमा के साथ ही नंदीश्वर दीप व सिद्धचक्र महामंडल विधान भी संपन्न होगा ।

 

वही भोपाल से आए ब्रह्मचारी अविनाश भैया ने बताया विधान के अंतर्गत 1024 मंडलों के साथ ही 1024 इंद्र इंद्राणी इस महामंडल विधान में भाग लेंगे जहां 25 जून को प्रातःकाल घट यात्रा के साथ ही भूमि शुद्धिकरण, ध्वजारोहण इत्यादि क्रिया संपन्न होगी एवं 26 जून प्रातः काल से श्रीजी का अभिषेक शांतिधारा के साथ ही महामंडल विधान प्रारंभ होगा वही शाम को विधान के अंतर्गत बैठने वाले सोधर्म इंद्र ,कुबेर इंद्र, यज्ञ नायक, महेंद्र, ईशान इंद्र, एवं श्रीपाल एवं मैना सुंदरी के पात्रों का चयन किया गया एवम संपूर्ण समाज के पंच महानुभव उनके घर गाजे-बाजे के साथ स्वागत करते हुए मंदिर प्रांगण तक लेकर आए।

 

वही जैन युवा संगठन के अध्यक्ष वैभव घाटलिया ने बताया विधान को लेकर संपूर्ण तैयारियां पूरी हो चुकी है और जैन युवा संगठन के सभी ग्रुपो के माध्यम से इस विश्व के प्रथम ऐतिहासिक महामंडल विधान को अंतिम रूप दिया गया

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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