सदा संत की तरह जीवन जीने वाले व्यक्तित्व श्रीमान माणकचंद जैन लाम्बाबांस अपने अंत समय में भी नेत्र ज्योति देकर औरों को देखने का जीवन दे गए
रामगंजमंडी
नगर के वयोवृद्ध श्रीमान माणकचंद लाम्बाबांस जिन्होंने सदा अपना जीवन सादगी पूर्ण तथा त्याग संयम के साथ अपना जीवन संत की तरह व्यतीत किया। वे प्रतिमा व्रत धारी थे और स्वयं के हाथों अपने कार्य को करना उनके जीवन की निशानी थी।
यह एक ऐसे व्यक्तित्व थे जो सुबह 5:00 बजे जिन मंदिर आ जाते एवं अपने दैनिक पाठ आदि के बाद श्री जी का अभिषेक पूजन संपन्न करते थे। इनका आजीवन नियम था जब तक अभिषेक पूजन आदि नहीं करेंगे तब तक कुछ नहीं लेंगे। यह नियम उनके अंत समय में भी साथ रहा। आपने अपने जीवन में सदा निर्मल परिणाम रखें। अंत समय में भी आपने प्रवचन आदि को सुना एवं णमोकार मंत्र जब ते हुए अपनी देह को त्यागा।

श्रीमान माणकचंद लाम्बाबांस सचमुच समाज के लिए एक माणिक थे सदा सभी के लिए प्रेरणास्पद रहने वाले व्यक्तित्व अपने अंत समय में भी अपनी नेत्र ज्योति देकर और को भी अपनी ज्योति प्रदान कर गए।

सूचना मिलते ही तुषार जैन टोनू, मोनू माहेश्वरी माणकचंद लाम्बाबांस के आवास पर पहुंचे जहां उन्होंने परिवार जन से संपर्क साधा और परिवार के उनके पुत्र अशोक लाम्बाबांस, सुरेश लाम्बाबांस, मनोज लाम्बाबांस व पौत्र एवम प्रपोत्र आशीष, हितेश, रूपेश, दर्शन, पीयूष, हिमांशु लाम्बाबांस परिवार (दौतड़ा वालो) ने इसकी स्वीकृति प्रदान की।

उसके बाद भारत विकास परिषद रामगंजमंडी व शाइन इंडिया के सहयोग से रामगंज मंडी का 32 वा नेत्रदान संपन्न हुआ।
नेत्रदान की क्रिया को पूर्ण करने के लिए कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन के डॉ कुलवंत गोड पहुंचे और उन्होंने नेत्रदान की प्रक्रिया को संपन्न किया। नेत्रदान की प्रक्रिया में रामगंज मंडी के दिनेश डपकरा डिस्को तुषार जैन टोनू ने अपना सहयोग प्रदान किया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
