गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी एवं संघ ने की शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर पर्वत की वंदना
पारसनाथ
साधना संयम तप अपने आप में अदभुत होता है उससे भी अधिक होता है लक्ष्य की ओर गतिशील होना पूज्य गणिनी गुरु मां विशुद्ध मति माताजी का संबल लक्ष्य की ओर बढ़ना सभी को एक प्रेरणा देता है।
पूज्य गुरु मां विशुद्धमति माताजी ने अपनी जन्मभूमि ग्वालियर से 1200 किलोमीटर का पद विहार किया और शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर पर पहुंची। इस लक्ष्य को पूर्ण करने में पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने अपना कुशल निर्देशन किया जो अपने आप में गुरु मां के प्रति उनके समर्पण भाव को दर्शाता है। साथ ही ग्वालियर समाज के कई व्यक्तियों ने व अन्य भक्तों ने इस लक्ष्य को पूर्ण करने में अपनी तन मन धन से सहभागिता दी। एवं संघपति व वह गुरु मां की सम्मेद शिखर तीर्थ यात्रा के पुण्यार्जक श्रीमान कैलाश किरण जैन खेड़ा वालों ने इस यात्रा में अपना तन मन धन समर्पित किया।


पूज्य गुरु मा ने गुरुवार की अनुपम बेला में प्रातः 4:00 सम्मेद शिखर तीर्थ पर्वत की वंदना को प्रारंभ किया और समस्त संघ एवं अन्य भक्तों के साथ पूरे पर्वत की वंदना की इतनी उम्र में गुरु मां का साहस सचमुच देखते बनता है।


यह दर्शाता है कि भावना श्रद्धा और लक्ष्य के प्रति हम कटिबद्ध होंगे तो हम लक्ष्य को पा सकते हैं। पूज्य गुरु मां की संयम साधना तप की अनुमोदना पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज पूर्व में कर चुके हैं। पूज्य गुरु मां की पर्वत की वंदना होने पर सभी जगह हर्ष व्याप्त है।


पूज्य गुरु मां का जीवन हमे प्रेरणा देता है। यही सीख देता है
लक्ष्य की ओर बढ़ते जाना
उम्र सीमा को ना देखना है
बस बढ़ते जाना है
जय गुरु मां है अद्भुत तप साधना
आपने की है जिन शासन की अद्भुत प्रभावना
आपके साहस संयम को हर किसी ने जाना
हर्षित है हम सब आपने की संघ सहित शाश्वत तीर्थ की वंदना
हे गुरु मां आपकी कोटि-कोटि अनुमोदना
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
