गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का सम्मेद शिखर तीर्थ पर हुआ मंगल आगमन। मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष

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गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी का सम्मेद शिखर तीर्थ पर हुआ मंगल आगमन। मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लिया आशीष
पारसनाथ
परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 विशुद्ध मति माताजी एवं पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञ मति माताजी का संघ सहित सम्मेद शिखर तीर्थ पर मंगल आगमन हुआ।

पूज्य माताजी ने लगभग 12 सौ किलोमीटर से भी अधिक उग्र पद विहार कर सम्मेद शिखर तीर्थ पर पहुंची। जहां माताजी संघ को ढोल नगाड़ों के साथ जय जयकारों के बीच तीर्थ स्थल पर प्रवेश कराया गया। पूज्य माताजी ने संघ के सहित मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का मंगल आशीष लिया जब माताजी संघ का यह समागम मुनि श्री से हुआ तब बहुत ही भाव विभोर कर देने वाले क्षण देखने को मिले

 

 

 

 

इस अवसर पर चैतन्य मति माताजी ने विशुद्ध मति माताजी का गुणानुवाद करते हुए कहा की उनका जैसा नाम है वैसा ही उनका परिणाम है। इतनी समता साधना करने वाली ऐसी हमारी विशुद्ध मति माताजी आज कहीं महीनो से विहार कर तीर्थराज सम्मेद शिखर यात्रा के लिए पधारी हैं।

इस अवसर पर पट्ट गणिनी आर्यिका 105 विज्ञमति माताजी ने कहा कि इस वर्ष माता जी का 54 वा वर्षायोग संपन्न होगा। सम्मेद शिखर तीर्थ का कण कण पवित्र है। वहा माता जी का 50 वा गणिनी पदारोहण दिवस मनाएंगे। मुनि श्री हम सभी को अपना वरद हस्त मंगल आशीष प्रदान करें।

इस अवसर पर विशुद्ध मति माताजी ने मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के समक्ष कहा कि आज हमारे बीच सिद्ध बनने की भूमिका में आगे बढ़े हुए हैं, जिनके चरण कमल, जिनकी पावन रज इनकी धुली को मस्तक पर लगाते हुए हम आगे बढ़ेंगे उस और सम्मेद शिखर पर्वत पर जहा अनंतानंत आत्माओं ने सिद्ध अवस्था को प्राप्त किया है। उन्होंने 1 मुहावरे के बोलते हुए कहा रही बहुत ही थोड़ी थोड़ी भी अब जाए और अपने रंग में भंग नही लाना है।

 

 

 

इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने माता जी की भावभीनी वाणी के द्वारा गुरु मां की हृदय से अनुमोदना की और अपना आशीर्वाद समस्त माताजी संघ को दिया। उन्होंने कहा सन 2002की स्मृति को बताते हुए कहा की जब हम फिरोजाबाद से शिकोहाबाद शौरीपुर बटेश्वर की ओर जा रहे थे तब शिकोहाबाद में संघ का आना हुआ था।


पूज्य माता जी की तारीफ करते हुए कहा कि बहुत वयोवृद्ध और अनुभवी आर्यिका हैं। और दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद भी समता भाव रखते हुए इतना उग्र बिहार करके आई है। यह सब सोचने की बातें हैं। उन्होंने कहा कि 1300 किलोमीटर की यात्रा कोई छोटी मोटी नहीं होती है। वह भी सर्दी आदि की बाधाओं को पार करते हुए। वह आई है उसकी आतुरता मुझे भी समझ आ रही है। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। जिस मकसद से वह यहां आई है। उसकी पूर्ति शीघ्र हो।

पूज्य गुरु मां ने आचार्य संभव सागर महाराज एवं अन्य संतों के जो भी मधुबन में विराजमान हैं उनके दर्शन किए।

इसके उपरांत मधुबन में एक विशेष समारोह आयोजित हुआ जिसमें संघपति कैलाश जैन खेड़ा वाले अभिनंदन किया गया। इसके साथ ही जिन सभी ने इस यात्रा में सहयोग दिया उन्हें सम्मानित किया गया

यात्रा के मुख्य संयोजक महेश दलाल, मुन्नी देवी दलाल, पदम जैन गाड़ व अन्य सभी को सम्मानित करते हुए सचिन जैन मुरार को श्रावक रत्न की उपाधि से सुशोभित किया गया।

सभी का सम्मान संघपति कैलाश जैन खेड़ा वालों द्वारा किया गया।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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