संसारी प्राणी राग ,द्वेष और मोह के कारण संसार में भ्रमण कर रहे हैं  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

संसारी प्राणी राग ,द्वेष और मोह के कारण संसार में भ्रमण कर रहे हैं  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
नसीराबाद राजस्थान

प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का किशनगढ़ से उदयपुर की ओर विहार चल रहा है इसी क्रम में नसीराबाद में मंगल प्रवेश हुआ नसीराबाद जैन समाज ने आचार्य श्री संघ की भव्य अगवानी की। जगह-जगह आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन एवं मंगल आरती उतारी गई ।आहार चर्या के बाद दोपहर को गुरुदेव के मंगल प्रवचन हुए।

 

मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने बताया कि अनेक तीर्थंकर एवं महापुरुषों ने धर्म को धारण कर मोक्ष रूपी लक्ष्मी सिद्धालय को प्राप्त किया है।

 

 

 

 

 

 

संसारी प्राणी अनादिकाल से संसार में भ्रमण कर रहे हैं उसका मूल कारण यही है कि आप राग द्वेष और मोह के कारण संसार में भ्रमण कर रहे हैं। संसार भ्रमण से छुटकारा पाने का उपाय यही है कि आप सम्यक दर्शन ,सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र को धारण कर राग द्वेष और मोह को नष्ट कर सकते हैं।

महापुरुषों ने धर्म को धारण किया है। उस धर्म पर आप सभी को श्रदान करना चाहिए और उसका अनुसरण करना चाहिए। धर्मात्मा के रूप में आज संघ का मंगल प्रवेश हुआ जितने भी साधु हैं वह धर्मात्मा है और धर्म आयतन से आशय मंदिर से है नसीराबाद में मंदिर भी है और आचार्य श्री ज्ञानसागर जी का समाधि स्थल भी है नसीराबाद को यह सौभाग्य मिला।आचार्य श्री का प्रवचन के बाद बिहार हो गया।

राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार

अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *