मानव जीवन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है मुनि श्री अजीत सागर महाराज

धर्म

मानव जीवन बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है मुनि श्री अजीत सागर महाराज
गंजबासौदा
पूज्य मुनि श्री अजीत सागर जी महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए। मानव जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव अपने जीवन का स्वयं शिल्पकार होता है। मानव जीवन बड़ी कठिनाई से मिलता है। उन्होंने कहा हमारा लक्ष्य क्या है? हमारा संकल्प क्या है? इसका निर्धारण तो हमें स्वयं करना होगा। भक्त से भगवान कैसे बना जाए? इसका निरंतर विचार करते रहना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

उन्होंने यह भी बात कही कि अपनी शंकाओं का समाधान गुरु चरण में आकर ही प्राप्त करना चाहिए। पूज्य गुरुदेव महावीर विहार में चल रहे सिद्धचक्र महामंडल विधान की धर्म सभा को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की विचारधारा अलग अलग हो सकती है, एवं लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग भी अलग-अलग हो सकता है। लेकिन लक्ष्य सिर्फ परमात्म पद तक पहुंचने का होना चाहिए। जो स्वरूप भगवान का है, या जिस स्वरूप से भगवान को हम देखते हैं जैसा स्वरूप जब तक हम प्राप्त ना कर ले तब तक प्रभु की भक्ति कर उनके गुणों का अनुसरण करते रहना चाहिए।

पूज्यश्री ने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं अनंत हुआ करती हैं इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझाते हुए उन्होंने कहा है कि जिस प्रकार आग में घी डालने पर आग बढ़ती है ठीक उसी प्रकार इच्छाओं की पूर्ति करने पर इच्छाएं बढ़ने लगती हैं। इच्छाओं पर नियंत्रण करके ही इच्छाओं पर नियंत्रण लगाया जा सकता है। उन्होंने आत्मा और शरीर के मध्य महत्व को भी समझाया और कहा कि दूध के अंदर घी होता है, दूध को तपाकर, पर्याय बदलकर उसे मथकर घी प्राप्त किया जाता है। उसी तरह शरीर को व्रत एवं संयंम से तपा कर भेद ज्ञान को मथानी से मथकर राग एवं द्वेष को कम कर आत्मा को पवित्र किया जा सकता है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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