राग रंग से परे आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
नसीराबाद
हमारे निर्ग्रंथ संत निर्मोही निस्पृही, और राग रंग से परे रहते हैं उन्हें किसी चीज से मोह ममता नहीं होती वै साधना के पथ पर बढ़ते चले जाते हैं। उनके लिए तो आकाश ओढ़न है धरती बिछोना है।
ऐसे ही क्षण आज देखने को मिले जब पूज्य गुरुदेव नसीराबाद से पूर्व मंगल विहार कर रहे थे तब वह मार्ग के बीच में ही बैठे हुए हैं उन्हें केवल संयम मार्ग पर बढ़ते जाना है और मुक्ति पथ की ओर बढ़ते हुए चलते जाना है ऐसा ही कर रहे हैं और उनके द्वारा अनेकों को मुक्ति के पथ पर अग्रसर करते हुए उन्हें उनका कल्याण किया है। यह केवल जैन संतों में ही देखने को मिलता है कि उन्हें किसी चीज से मोह राग रंग नहीं है यह दृश्य उसी और लाते हैं।

राग रंग से परे गुरुवर
मानो लगते हैं यह ईश्वर
यह जानते हैं यह संसार है नश्वर
वह जानते हैं यह देह है नश्वर
स्वयं भी चल रहे औरों को भी ले जा रहे मोक्ष के पद पथ पर
जय हो श्री वर्धमान सागर गुरुवर
राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन
अभिषेक लुहाड़िया रामगंज मंडी
