उपकार करके भूलजाने की आदत बनाओ*–मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज
टीकमगढ़ –
-उपकार करके उसी में ना उलझे उपकार के भूल जाने की आदत डालें संसार की स्थिति ही ऐसी है जब किसी को आपसे काम होता है तो वह आपके आस पास घूमता रहता है,और जैसे ही उसका काम पूरा हुआ वह आपको छोड़ कर चला जाता है।
गरज परत कछु और है गरत गिरत कछु और तुलसी भावंर जब परे नदी शिरावे मौर जिस मौर को विवाह के समय सिर पर बाधकर दूलाराजा कन्या से विवाह कर रहा था।


शादी के बाद उसी मौर को नदी में सिराते देख तुलसीदास जी ने ये पंक्तियां लिखी है। ये स्वार्थ का संसार है तब तो वैराग्य होता है नहीं तो हम लोग कहा से आते इसी संसारिक दशा को देखकर वैराग्य को प्राप्त होते हैं यह विचार मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज ने नन्दीश्वर मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
