आज ही के दिन जब आगरा की धरा पर प्रथम बार निकले थे पंच गजरथ- ध्रुव जैन की कलम से
आगरा
24 फरवरी 1994 । स्वर्णिम ऐतिहासिक दिवस, वह लिखते हुए बताते हैं कि गुरु उपकार दिवस क्या लिखूं समझ नही आ रहा । प्रातः काल पावापुरी से प्रभु वर्धमान का मोक्ष हुआ । अग्निकुमार देवों द्वारा केश एवं नख का विसर्जन किया । सब लोग खुशी मना रहे थे, सब जन हर्षा रहें थे।

क्योंकि पंचकल्याणक की अंतिम क्रिया थी । लोगों ने सोचा अब तो इतिहास रच गया, क्या पता था, इतिहास तो अब रचने वाला है ।
विशाल जनसमूह के मध्य मुनिवर श्री क्षमा सागर जी सुधा सागर जी वर्धमान सागर जी क्षुल्लक श्री 105धैर्य सागर गंभीर सागर जी महाराज एक ढाल बन पंच गजरथ के आगे आगे चल रहे थे । आगरा के इतिहास में प्रथम बार पंचगजरथ महोत्सव जो हो रहा था ।

इतना विशाल पंडाल और उसकी 7 परिक्रमा करना अपने आप में असीम पुण्य का बंध करवाने वाला था । सच में जो कोई श्रावक उस समय उस ऐतिहासिक पल के साक्षी होंगे वह सभी धन्य है । धन्य है । धन्य है ।।

अभिभूत होकर ध्रुव जैन बताते है की हम सभी कमला नगर ही नही सम्पूर्ण आगरा वासी कभी गुरुदेव के असीम उपकार का कर्ज कभी नही चुंका पाएंगे ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
