क्षुल्लिका 105 विलोक्यमति माताजी की समाधी
वदनारा
परम पूजनीय भारत गौरव डॉक्टर ग्वालियर तिलक बाल ब्रह्मचारिणी विश्व की प्रथम गणिनी आर्यिका श्री 105 विशुद्ध मति माताजी की योग्य शिष्य गणिनी आर्यिका श्री 105 विशिष्टमति माताजी की शिष्या क्षुल्लिका 105 विलोक्यमति माताजी की समाधि महाराष्ट्र जालन से 20 किलोमीटर वदनारा जैन उपासरा ब्लॉक में हुई।
पूज्य माताजी का स्वास्थ्य कई दिनों से खराब चल रहा था। आज प्रातः माताजी ने समस्त प्रकार के आहार का त्याग कर दिया था। गणिनी गुरु मां विशिष्ट मति माताजी के निश्रा में णमोकार मंत्र का स्मरण करते हुए पूज्य माता जी की निर्विघ्नं पूर्वक समाधि हो गई। उनकी अंतिम यात्रा 2:45 बजे रवाना होगी।


जानकारी अनुसार पूज्य माताजी का जन्म बिहाडा राजस्थान में हुआ माताजी जाने-माने पंडित श्री रतनलाल जैन के परिवार की सदस्य थी।

पंडित श्री रतन लाल जैन विशुद्ध मति माताजी के अनन्य भक्तों में एक थे। पूज्य माता जी की दीक्षा विगत कई वर्षों पूर्व राजस्थान की पावन धरा टोंक में हुई थी।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
