धरियावद नगर के गौरव दीक्षार्थी आदेश्वर पचोरी की दीक्षा वात्सल्य वारिधि के कर कमलों से 13 फरवरी को होगी
पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के द्वारा धरियावद नगर के गौरव दीक्षार्थी आदेश्वर पचोरी की की दीक्षा 13 फरवरी को मार्बल नगरी किशनगढ़ में होने जा रही है।
एक परिचय आदेश्वर पचोरी

यदि हम इनके जीवन कृतित्व पर नजर डालें तो इनका जीवन काफी विशालता लिए हुए हैं वह धर्ममय है। सचमुच कहा गया है कि द्वितीय हमेशा अद्वितीय बनकर परिलक्षित होता है वैसा ही इनके जीवन में भी हुआ। जी हा इनका जन्म श्रीमती सागर बाई
जड़ावचंद जैन की बगिया में दिव्य पुत्र के रूप में श्री आदेश्वर जैन का जन्म खूंता ग्राम में 5 मई 1955 को हुआ।श्रीमती पुष्पा देवी से विवाह हुआ। इनके 2 पुत्र तथा दो पुत्री है ।


इन्होंने लौकिक शिक्षा हायर सेकेंडरी उत्तीर्ण की।आपने विवाह जीवन को सादगी व धर्म के साथ जिया जो उनके व्यवसाय में भी नजर आया। इन्होंने धरियावद में रहते हुए किराना तथा प्रापर्टी का व्यापार किया। यह धार्मिक प्रेरणा से ओतप्रोत थे इसीलिए इन्होंने हमेशा अहिंसात्मक कार्यों का ही व्यापार किया। कभी भी इन्होंने अपनी दुकान से फटाके का विक्रय नहीं किया । जो इनके धर्ममय होने का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
गृहस्थ अवस्था में रहते हुए भी इनका जीवन धर्ममय रहा और समय-समय पर व्रत वह नियमों को अंगीकार करते हुए। क्रमश दो प्रतिमा तीन प्रतिमा 4 तथा 5 प्रतिमा के नियम लिए ।
वैराग्य की प्रेरणा
चार भाई तथा चार बहनों के भरे पूरे परिवार के बावजूद
संसार में रहते हुए भी इन्हें संसार से विरक्ति का भाव सदा बना रहा और इन्हें वैराग्य मार्ग पर आगे बढ़ने की
प्रेरणा चतुर्थ पट्टा धीश आचार्य श्री अजीत सागर महाराज ,आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी के त्याग में जीवन से प्राप्त हुई। उनका यह क्रम बढ़ता चला गया। धर्म और स्वाध्याय में रुचि होने के कारण आपके द्वारा छहढाला , रत्नाकरणडश्रावकाचार , तत्वार्थ सूत्र, अष्ट पाहुड़, समयसार ,द्रव्य संग्रह आदि धार्मिक ग्रंथों का स्वाध्याय नियमित रूप से किया।
श्री मुनिसुब्रतनाथ पंचायत के विनोद पाटनी एवम सुभाष बड़जात्या ने बताया किइन्हें कभी धन, मोह,माया से कभी लोभ नही रहा। जिसका उदाहरण है विगत कई वर्षों से धरियावद के मंदिर में सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम में धार्मिक पूजन विधान आदि निशुल्क कराए। इसके साथ ही काफी वर्षों से साधुओं को आहार दान एवं वेय्यावृत्ति सेवा करते हैं।
इनके द्वारा अपनी चंचला लक्ष्मी का उपयोग धर्म कार्यों में किया गया। जिसका सर्वोत्तम उदाहरण है, मऊ अतिशय क्षेत्र के विकास में भी विशेष रूप से तन मन एवं धन से किया गया सहयोग। अपने ज्ञान का सदुपयोग करते हुए इन्होंने यह ज्ञान औरों तक भी पहुंचाया और धरियावद में इनके द्वारा धार्मिक रात्रि पाठशाला का संचालन किया गया तथा स्वाध्याय मंडल का गठन भी किया गया।
सचमुच इनका जीवन धर्ममय अब यह 13 फरवरी 2023 को किशनगढ़ की पावन माटी पर सर्वोत्कृष्ट पद मुनि दीक्षा को पाने जा रहे हैं।
गौरव पाटनी, राजेश पंचोलिया वात्सल्य भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
