संयुक्त परिवार ही जीवन में सुख शांति समृद्धि देता है प्रसन्नसागर महाराज

धर्म

संयुक्त परिवार ही जीवन में सुख शांति समृद्धि देता है प्रसन्नसागर महाराज
पारसनाथ
परम पूज्य अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महामुनिराज महापारणा ओर पंचकल्याणक महामहोत्सव ओर सिद्धायतन के पंचकल्याणक के कार्यक्रम के बीच भव्य मंगल आगमन बीसपंथी कोठी मधुबन में हुवा। मंगल आगमन की बेला में हज़ारों यात्रियों ओ संबोधन करते हुवे कहा कि संयुक्त परिवार ही जीवन में सुख शांति और समृद्धि देता है।
वृक्ष की डाल से टूटते हुये पत्ते ने कहा – बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देंगे।
घर परिवारों में लम्बे समय बाद देखने और सुनने को मिल रहा है कि एक छत के नीचे रहने वाले लोग भी अपने आपको अकेला महसूस करने लगे हैं। अपने संग साथ रहने वाले लोग भी यात्री और अतिथि जैसे हो गये हैं। रिश्ते सौदा बनकर रह गए।

 

 

 

 

घर-परिवार में अपने ही अपनों का शोषण करने लगे। इसलिए आज हमारे घर परिवारों से माता बहिने बाहर निकल आई है। घर से बाहर निकलने के दो कारण है — एक आर्थिक व्यवस्था और दूसरा अकेलापन । माता बहिने कितना ही पैसा कमा ले लेकिन उनकी ज़िन्दगी से संघर्ष और शोषण कम नहीं हुआ। तभी हमारे बड़े बुजुर्गों ने संयुक्त परिवार की व्यवस्था बनाई थी और हम आप उनकी वरदानी छांव में हँसते मुस्कुराते निश्चिंत होकर, तब दिन ही नहीं – वर्ष भी नहीं – पीढियां जैसे पल में बड़ी खड़ी हो जाती थी। जैसे- जैसे परिवार बढ़ता, पुराने मकानों में, नये हिस्से जुड़ते जाते । ना सुरक्षा की कमी लगती, ना अकेलापन और ना मन को सहारों की जरूरत पड़ती थी।

 

 

अब-जब घर परिवारों में- ये तेरा, ये मेरा का नज़रिया बदला और देखा देखी के प्रभाव ने जड़े जमाना यूं शुरू किया कि पुराने मजबूत वृक्षों की जड़ो में जैसे – मट्ठा पड़ गया हो। निजी स्वार्थ और लोभ-लालच के प्रभाव ने घर परिवारों से मन के रिश्तों को खत्म कर दिया । इसलिए आज कोई भी किसी भी रिश्तों में आत्मीय अपनापन का स्वाद नहीं है। आज के रिश्ते मैगी जैसे हो गये हैं ।

 

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

 

शुद्ध जैन भोजन के साथ यात्रा

संयुक्त परिवार से इतने लाभ थे जैसे –संयुक्त परिवार में एक जुटता दिखती थी।• बड़े-बुजुर्गों की अनुभव की बातें सुनने को मिलती थी। कही भी आने जाने की स्वतन्त्रता थी । घर के सभी बच्चों के लिये एक जैसा माहौल रहता था । संयुक्त परिवार में आर्थिक झंझावात से मुक्त थे। इसलिए मन बार बार यह गीत गाता है गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दोबारा – हाफिज खुदा तुम्हारा..

कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा। से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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