आप जो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं उसे अपने तक सीमित ना रखें आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने चंद्र गिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में अपने उद्बोधन में कहा कि नाखून को नाखून इसलिए कहते हैं क्योंकि उसमें खून नहीं होता। वैद्य और डॉक्टर नाखून देखकर शरीर में रक्त की मात्रा का पता लगा लेते हैं। उन्होंने कहा जब भगवान का मोक्ष होता है, तो वे अपनी आयु पूर्ण कर कपूर की भांति उड़ जाते हैं। सिर्फ नाखून शेष बचता है। उसी प्रकार जब किसी व्यक्ति की मृत्यु निकट होती है तो उसका नाखून नीला होने लगता है।
आचार्य श्री ने कहा इस प्रकार मुनि महाराज अपनी मृत्यु को निकट देखकर डरते नहीं हैं बल्कि उसको सहज स्वीकार कर उसका स्वागत करते हैं और मृत्युंजय हो जाते है।
पूज्य श्री ने सीख देते हुए कहा कि आप जो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं उसे अपने तक सीमित ना रखें। प्रशिक्षण प्राप्त करने के पश्चात स्वयं दूसरों को प्रशिक्षण दे। जिससे दूसरों को भी इसका लाभ मिल सके। उन्होंने एक उदाहरण के माध्यम से बताया कि यदि एक व्यक्ति प्रशिक्षण प्राप्त कर 10 नए लोगों को प्रशिक्षण देता है और वह 10 लोग 10 लोगों को प्रशिक्षण देते हैं इस प्रकार से यह कार्य तीव्र गति से आगे बढ़ता जाएगा। और सभी को इसका लाभ मिल सकेगा। पूज्यश्री ने कहा कि तीर्थंकर और केवली भगवान की वाणी को आचार्यों ने सुनकर हमें बताया है कि परोपकार सबसे बड़ा धर्म है। इससे व्यक्ति स्वयं भी ऊपर उठता है। और अपने साथ दूसरों को भी ऊपर उठाने में सहायक होता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
