गुरु ने जो प्रकाश दिया है वह भूतों न भविष्यति है समयसागर महाराज
कुंडलपुर
नवाचार्य श्री 108 समय सागर महाराज ने आचार्य पद पर आसीन होने के बाद अपना प्रथम उद्बोधन दिया यह कहे तो उन्होंने आचार्य पद के बाद प्रथम मंगलाचरण किया उन्होंने गुरु महिमा का बखान किया एवं सत्य एवं शीलता के विषय में बताया।
आचार्य भगवन ने कहा की सत्य और शीलता अविरल है, इसीलिए आज धरातल पवित्रता अनुभव कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रभु का दर्शन ना आपने किया ना हमने किया प्रभु का दर्शन गुरु के माध्यम से ही किया जा सकता है। क्योंकि गुरुदेव से ही अवलोकन हो सकता है।आचार्य गुरुवर विद्यासागर महाराज को स्मृति में लाते हुए महाराज श्री ने कहा की अब गुरुदेव आपके सामने उपस्थित नहीं है।





व्यवहार की दृष्टि है समूचे विश्व के लिए उन्होंने जो प्रकाश दिया है वह भूतों ना भविष्यति है। इस प्रकार प्रकाश वही दे सकता है जो सत्य एवं शीतलता दे सकता है। शास्त्र को पढ़ना, और उसका पालन करना है। खेल नही है। परंपरा समझने समझाने की प्राचीन परंपरा है। आज सुनने वाले दुर्लभ और बुनने वालो की संख्या भी दुर्लभ हैं।
आचार्य श्री ने कहा किआचार्यों की परंपरा बहुत पुरानी है। आचार्य गुरुदेव महाराज है। सारा संघ उनका है। बहुत सारे उपसंघ हुए हैं, हमने सुन लिया। उपसंघ जिसमें संख्या अपेक्षा से बहुत अधिक है। किंतु बहुत बड़ी भूल हो गई है। उपसंघ है, अपसाखाएं हैं। यह किसके हैं आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के वृक्ष के है। वृक्ष के बिना साखा, न फूल, न जड़, न फल हो सकता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
