कर्मअच्छा करोगे तो फल भी अच्छा मिलेगा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज
डोंगरगढ़
चंद्र गिरी तीर्थ पर आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यहां छोटे-छोटे गांव केl लोग बहुत ही भाग्यशाली है। बड़े-बड़े महानगरों की तुलना में जिन्हे अपनी मेहनत और परिश्रम में विश्वास होता है। यदि आप बबूलका बीज बोओगे तो कांटे मिलेंगे औरआम का बीज बोओगे तो आम केमीठे-मीठे फल मिलेंगे। कर्म करो
फल की चिंता मत करो, कर्म अच्छाकरोगे तो फल भी अच्छा ही मिलेगा,लेकिन उसके लिए उचित समय तक
इंतजार करना पड़ेगा।
उन्होंने कहा गांव के लोग परिश्रम करते है तो उन्हें आराम करने में भी आनंद आता है और शहर के लोगो को सोने के लिये भी गोलियां खानी पड़ती है। गांव के लोगों में व्याकुलता नहीं होती है उनके परिणाम स्वच्छ और शांत होते है। वे संतोषी होती है। यदि आपको शांति की अनुभूति चाहिए तो आपको कहींदेश, विदेश, महानगरों आदि में जाने की आवश्यकता नहीं है। आपके पासजो है उसी में संतुष्ट हो जाओ तोशांति अपने आप मिल जाएगी।गाय ज गर्भ धारण करती है तो उसकीसमुचित व्यवस्था प्रकृति अपने आपकर लेती है। प्रसव काल के दौरानसारी प्रक्रिया प्राकृतिक तरीके से
अपने आप होती है और बछड़े केजन्म के बाद गाय के थन में ममत्वके कारण दूध अपने आप भर जाता
है, परन्तु आज मनुष्य इस प्राकृतिकप्रक्रिया को शल्य क्रिया के द्वाराकरवाता है जिससे मां और बच्चे पर
इसका असर पड़ता है। 80 प्रतिशतप्रसव शल्य चिकित्सा के द्वारा कियाजा रहा है जो कि पूर्ण रूप से व्यवसायिक हो गया है, इसका आपलोगों को मिलकर विरोध करनाचाहिए। यह एक प्राकृतिक क्रिया है जो स्वमेव होती है और होती रहेगी।
उन्होने कहा गाय के गोबर का प्रयोग घरों मेंआंगन आदि लीपने में कियाजाता था जिससे ठंड में गर्मी
तथा गर्मी में घर का वातावरणठंडा रहता था और गाय को घरमें रखने से प्रदूषण भी नहीं होता,पहले घरों में गाय के गोबर सेचूल्हा लिपा जाता था और चूल्हेके धुएं से आंखों में आंसू आनेके कारण आंखें भी साफ होजाती थी, हम जो कर्म आज कररहे हैं उसका फल भविष्य मेंमिलना निश्चित है, इसलिए हमेंअपने कर्म, भाव और परिणामको स्वच्छ और संयमित रखना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
