किशनगढ़ पंचकल्याणक महोत्सव
श्री शांति वीर शिव धर्म अजित वर्धमान सुरिभ्यो नमः
मार्बल नगरी ,साधुओं की जन्म भूमि,दीक्षा भूमि, समाधि भूमि18 जिनालयों की भूमि किशनगढ़ में 22 जनवरी से होगा पंच कल्याणक प्रारंभ

किशनगढ़ राजस्थान
मदनगंज किशनगढ़ नाम अखिल भारतीय स्तर पर किसी परिचय का मोहताज नही है।
प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी महामुनिराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिघि
108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी विशाल संघ सहित 22 जनवरी 2023 से 27 जनवरी 2023 तक होने वाले श्रीमद जिनेन्द्र भगवान के पंच कल्याणक हेतु 18 जनवरी को किशनगढ़ पधार कर विराजित हैं।

पंच कल्याणक आयोजक श्री मुनिसुब्रत नाथ दिगंबर पंचायत के श्री विनोद पाटनी अध्यक्ष एवम् मंत्री श्री सुभाष बड़जात्या ने बताया कि दिनांक 22 जनवरी एवम् 23 को गर्भ,24 को जन्म,25 को तप ,26 को ज्ञान तथा 27 जनवरी को मोक्ष कल्याणक संहिता सूरी पंडित श्री हसमुख जी शास्त्री प्रतिष्ठाचार्य के निर्देशन में संपन्न होगे। इन 6 दिनों में विभिन्न धार्मिक एवम् सांस्कृतिक कार्यक्रम भी ख्याति नाम कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए जायेगे।

प्रचार संयोजक गौरव पाटनी ने बताया कि दिनांक 22 जनवरी को विशाल घटयात्रा कलश यात्रा
नगर के प्रमुख मार्गो से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में निकाली जावेगी

जिनमे 3 भव्य रथों पर श्री जी विराजित रहेंगे,जलूस की शोभा में वृद्धि करने के लिए 7 गजराज ,8 बग्गी तथा 4 बैंड सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देंगे।

मुनि श्री हितेंद्र सागर जी एवम् आर्यिका श्री महायश मति जी ने बताया कि श्रीमति मनोरमा देवी कमलचंद जी सनावद के पुत्र श्री यशवंत जी का जन्म 18 सितंबर 1950 को हुआ। आपने 24 फरवरी 1969 में आचार्य श्री धर्म सागर जी से मुनि दीक्षा ली आपको 24 जून 1990 को पारसोला में आचार्य पद आचार्य श्री अजित सागर जी ने लिखित पत्र से दिया । आचार्य श्री ने अभी तक 101 दीक्षा दी है।
इसके पूर्व वात्सल्य वारिघि

आचार्यश्रीवर्धमानसागरजीवर्ष1971,1977,1984,1987,1998,1999,2014, तथा वर्ष 2015 इन 9 वर्षो में 12 बार से भी अधिक किशनगढ़ आए। आचार्य श्री ने किशनगढ़ में पंचकल्याणक वर्ष 1987,अप्रैल 2015,मई 2015 में की है।आपने वर्ष 2015 में मुनि,आर्यिका,क्षुल्लक कुल 7 दीक्षा भी दी है। किशनगढ़ को यह गौरव प्राप्त है कि आचार्य श्री का 25 वा आचार्य पदारोहण रजत कीर्ति वर्ष सन 2014 में यही मनाया गया हैं आचार्य श्री ने वर्ष 1977,1987,1998, तथा वर्ष 2014 का चातुर्मास किशनगढ़ किया हैं। किशनगढ़ में अभी तक 10 से अधिक समाधि भी चुकी है।मुनि श्री समता सागर जी मुनि श्री निस्पृह सागर जी,मुनि श्री भविक सागर जी त्थाआर्यिका श्री निर्मुक्त मति जी किशनगढ़ के है।
दिनांक 20 जनवरी को वर्धमान सभागार में अविस्मरणीय हल्दी की रस्म हुई। जिसमे संहिता सूरी प्रतिष्ठाचार्य श्री हँसमुख जी धरियावद के निर्देशन में प्रमुख पात्रों की हल्दी के पूर्व मंत्रोचार से तन शुद्धि कराई गई। दिनांक 21 जनवरी को मेंहदी की रस्म वर्धमान सभागार में होगी
गौरव पाटनी प्रचार संयोजक
राजेश पंचोलिया इंदौर
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
