श्री शांति वीर शिव धर्माजीत वर्द्धमान सुरिभ्यो नमः
क्षपक मुनि श्री चारित्र सागर जी का जीवन परिचय
समाधि दिवस 21 जनवरी 23 पर विशेष परिचय
पूज्य मुनि श्री का,जन्म सन 1936 में हुआ मुनि दीक्षा सन 1993 में हुई व समाधि सन 2002 में हुई।
जन्म
मध्यप्रदेश खरगोन जिले में सनावद के निकट मोगावा ग्राम के श्रीमति भागा देवी श्री नेमीचंद जी के तृतीय पुत्र श्री त्रिलोकचंद जी का जन्म 27 जुलाई 1936 को सनावद में हुआ
व्रती संयमी जन्मदायनी माता से प्राप्त संस्कार
बचपन से जन्मदायनी माता से प्राप्त संस्कार समय समय पर
देखते रहे। आपकी पूज्य माताजी स्वयम प्रतिदिन एक रस का त्याग कर केवल एक समय भोजन करती थी इतना ही नही वे स्वयम हाथ से गेहूं पीस कर शुद्ध कपड़ो में 4 बहुएं होने के बावजूद खाना। स्वयम बनाती थी। उनका , आजीवन शुद्र जल त्याग का नियम था साधुओ को आहार देती थी घर में रहकर प्रतिमा नियमो का पालन करती थी। वही संस्कार उन्होंने पुत्रो बहुओं पोते पोतियों को दिए। आपके 2पुत्र एवम चार पुत्रियां है
संस्कारो से वैराग्य का बीजारोपण

इन्ही संस्कारो के बीजारोपण कारण एक पुत्र श्री त्रिलोकचंद जी श्री चारित्र सागर जी तथा एक पोते श्री नरेन्द्र श्री श्रेष्ठ सागर जी ने मुनि दीक्षा ली तथा पड़ पोती बाल ब्रह्म सिद्धा दीदी ने आर्यिका दीक्षा लेकर श्री महायशमती बनी। तथा पोती साधना आर्यिका श्री निर्मोह मति बनी। लेकिन माताजी पारिवारिक जिम्मेदारी कारण स्वयम दीक्षा नही ले पाई।
श्री त्रिलोकचंद जी को मिला संत समागम
नगर में चातुर्मास रत आर्यिका 105 सुपार्श्वमति जी आर्यिका 105श्री ज्ञानमति माताजी एवम श्री सिद्धवरकूट क्षेत्र आने वाले आचार्य संघों के समागम सानिध्य से इनमे वैराग्य की भावना वृद्धि गत होती रही।
वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री को दीक्षा के लिए किया श्रीफल भेंट
दो पुत्रों ,राजेश,अजय चार पुत्रियों साधना,आरती, मीना,रीना के संसारिक दायित्यों से निवृत होकर पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108 वर्द्धमान सागर महाराज जी के 26 वर्षों बाद प्रथम नगर आगमन पर 14 मार्च 1993 को श्रीफल अर्पित कर एक वर्ष में मुनि दीक्षा देने हेतु निवेदन किया।ओर तभी से संघ में शामिल हो गए।
मुनि दीक्षा

तीर्थ क्षेत्र श्री श्रवणबेलगोला में 25 नवम्बर 1993 को पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री 108वर्द्धमान सागर जी महाराज से मुनि दीक्षा लेकर नाम मुनि श्री108 चारित्र सागर प्राप्त किया
व्रत उपवास
अल्प कालीन 9 वर्ष के साधु जीवन मे लगभग 800 से अधिक उपवास कर कर्मो की निर्जरा की
चातुर्मास
वर्ष 1993 श्री श्रवण बेलगोला
2 1994 श्री श्रवण बेलगोला
3 1995 श्री कुम्भोज बाहुबली
4 1996 गिंगला
5 1997 पार सोला
6 1998 किशनगढ़
7 1999 जयपुर
8 2000 टोडारायसिंह
9 2001 सनावद जन्म भूमि
सनावद में समाधि

एक संयोग रहा कि वात्सल् वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से सनावद चातुर्मास का निवेदन किया कि सागर नही तो कुछ लहरे ही दे दीजिए
करुणाधारी आचार्य श्री ने संघस्थ मुनिश्री हित सागर जी श्री चारित्र सागर जी श्री अपूर्व सागर जी श्री देवेन्द्र सागर जी एवम ऐलक श्री नमित सागर जी को जन्म भूमि सनावद में सन 2001 का वर्षायोग करने की अनुमति दी।
चातुर्मास के बाद स्वास्थ्य प्रतिकूल होने से 21 जनवरी 2002 को आपकी समाधि हो गई एक संयोग था कि सनावद में जन्मे साधु की सनावद में समाधि हुई।
परिवार को सुसंस्कार
मुनि श्री चारित्र सागर जी के संस्कारों एवम जीवन ने पूरे परिवार को त्याग मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया सबसे ज्यादा प्रभाव पोती पर हुआबाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा जब 4 वर्ष की थी तब दादाजी ने 1993 में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से श्रवण बेलगोला में सीधे मुनि दीक्षा ली वर्ष 2002 में मुनि श्री चारित्र सागर जी की समाधि जन्म नगरी सनावद में हुई तब सिद्धा दीदी की उम्र मात्र 13 वर्ष की थी उन्ही के संन्यास मार्ग से सिद्धा के मन मे वैराग्य का बीजारोपण हुआ ।
यह भी एक संयोग है कि श्री श्रवण बेलगोला में आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी से 25 नवम्बर को श्री चारित्र सागर जी की दीक्षा हुई उसी पावन भूमि पर उन्ही आचार्य श्री से 25 वर्ष बाद 25 तारिख को पोती बाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा दीदी आर्यिका दीक्षा लेकर श्री महायश मति बनती है।
पुत्री भी संन्यास मार्ग पर


आपकी बड़ी पुत्री साधना भी आपके संस्कार अनुरूप त्याग मार्ग पर अग्रसर होकर आपने आचार्य श्री से 2 व्रत प्रतिमा के नियम अंगीकार कर फिर 7 पतिमा के व्रत लेकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से 5 अक्टूबर 2022 दशहरे पर श्री महावीर जी में आर्यिका दीक्षा लेकर 105 आ श्री निर्मोह मति जी है।
नगर सनावद का गौरव है कि सनावद के 17 साधुओ में पंचोलिया परिवार से 6 दीक्षा निम्न। हुई
आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
मुनि श्री चारित्र सागर जी
मुनि श्री श्रेष्ठ सागर जी
आर्यिका श्री सुदृढ़ मति जी
आर्यिका श्री महायश मति
क्षुल्लक श्री मोती सागर जी
यही मंगल कामना है कि सभी धर्म की प्रभावना करते हुए सर्वोच्य पद को प्राप्त करे।
राजेश पंचोलिया सनावद इंदौर 9926065065
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
