धर्म नगरी चितरी में पूज्य मुनि श्री सुयत्नसागर जी की निश्रा में सानंद संपन्न हुआ जिन पद सेवक क्षेत्रपाल विधान -* *जिनालय जीर्णोद्धार पूर्ण होने पर 22 फरवरी सन 2023 से हो रहा है श्रीमज्जिनेद्र पंच कल्याणक महामहोत्सव*

धर्म

*धर्म नगरी चितरी में पूज्य मुनि श्री सुयत्नसागर जी की निश्रा में सानंद संपन्न हुआ जिन पद सेवक क्षेत्रपाल विधान -*

*जिनालय जीर्णोद्धार पूर्ण होने पर 22 फरवरी सन 2023 से हो रहा है श्रीमज्जिनेद्र पंच कल्याणक महामहोत्सव*

चितरी

राजस्थान के वागड़ प्रांत में स्थित चार संतो की जन्मभूमि चितरी नगर में दिनांक 22 फरवरी से होने वाले श्रीमज्जिनेद्र पंच कल्याणक महामहोत्सव से ठीक एक माह पूर्व आज दिनांक 21 जनवरी को पंच कल्याणक के सानिध्य प्रदाता पूज्य मुनि श्री सुयत्नसागर जी गुरुदेव की पावन निश्रा में जिन पद सेवक 96 क्षेत्रपाल देवो के विनय हेतु विधान किया गया।

जिसमे चितरी जैन समाज की श्री चंद्रप्रभु महिला मंडल ने अत्यंत भक्ति उत्साह के साथ पूजन द्रव्यों को ध्वज सहित विधि पूर्वक सजा कर भाग लिया।
ज्ञात रहे चितरी के 200 वर्ष प्राचीन श्री चंद्रप्रभु जिनालय का जीर्णोद्धार पूर्णता की ओर है।

सन 2015 में प्रज्ञायोगी आचार्य श्री गुप्तिनंदी जी गुरुदेव की पावन प्रेरणा से जीर्णोद्धार के संकल्प पूर्वक नव ग्रह शांति विधान किया गया था।
जिसमे सम्मिलित होने वाले पात्रों के न्योछावर दान को मंदिर जीर्णोद्धार में समर्पित करने का निश्चय हुआ और इसी नेक उद्देश्य के साथ उस विधान में श्री समाज के प्रत्येक परिवार ने बढ़ चढ़कर तन मन धन के साथ हिस्सा लिया। उसी के फलस्वरूप जीर्णोद्धार हेतु उचित फंड निर्मित हुआ साथ ही श्री समाज के सरक्षक सेठ हुक्मचंद जी ने मूलनायक वेदी व सेठ देवेंद्र जी ने क्षेत्रपाल वेदी निर्माण में दान न्योछावर किया।

 

 

 

 

उसके उपरांत सन 2019 राष्ट्र गौरव चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी गुरूराज के सानिध्य में मूलनायक श्री चंद्रप्रभु भगवान का संकल्प पूर्वक प्राचीन वेदी से उत्थापन करके पूज्य आचार्य श्री सुनील सागर जी गुरुदेव के मार्गदर्शन व संहितासूरी प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी के निर्देशन में जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हो गया।

जो लगभग सन 2023 के प्रारंभ तक पूर्णता की ओर होने जा रहा है।

गुरुदेव की आज्ञानुसार दिनांक 22 फरवरी से 24 फरवरी 2023 तक मुनि श्री सुयत्न सागर जी व नगर गौरव आर्यिका श्री सुनिधि मति माताजी के पावन सानिध्य व प्रतिष्ठाचार्य श्री हंसमुख जी साहब के तत्वाधान में पंचकल्याणक महोत्सव सम्पन्न कराने की स्वीकृति प्राप्त हुई।
इस हेतू दिनांक 16 जनवरी को आवश्यक मुख्य पात्रों का चयन हुआ जिसमे नगर गौरव मुनि श्री चंद्र गुप्त जी के पूर्वाश्रम के मातापिता श्रीमान शाह राजेंद्र जी -शकुंतला देवी भगवान के माता पिता,शाह भवर लाल जी -कैलाश देवी सोधर्म इंद्र,शाह चेतन लाल जी -सुलोचना देवी कुबेर इंद्र,शाह मधोक जी -शीतल देवी यज्ञनायक इंद्र,सेठ महिपाल जी – निर्मला देवी ईशान इंद्र,शाह रजनीकांत जी -जयवंति देवी सनत इंद्र,सेठ कांतिलाल जी परिवार महेंद्र इंद्र, फाईयोत राजेंद्र जी फूलवंती देवी ब्रह्म इंद्र,फाईयोत कमलेश जी -रीता देवी शुक्र इंद्र, दोसी संजय जी -राजश्री देवी महाशुक्र इंद्र,शाह प्रकाश जी -संगीता देवी शतार इंद्र,सेठ भरत जी – शिल्पा देवी लांतव इंद्र व सेठ मणिभद्र जी – टीना देवी प्राणत इंद्र,सेठ हुक्म चंद जी -विमला देवी आरण इंद्र,सेठ अतुल जी -रिंकू देवी अच्युत इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त किया।

शाह भूपेश -मोहिता देवी आदिनाथ चेत्यालय परिवार ने विधिनायक भगवान आदिनाथ जी की नवीन प्रतिमा व शाह कल्पेश जी -नमिता देवी ने अरहनाथ भगवान की नवीन प्रतिमा का सौभाग्य,शाह कचरी देवी धर्म पत्नी श्रीमान कन्हैयालाल जी ने भगवान की बुआ का सौभाग्य प्राप्त किया

बाल गोपालो में रिद्धि सेठ,किनाया सेठ, हवी सेठ,सखी शाह, सांशी शाह,नेही शाह,चेरी पंचौरी व कुमकुम दोसी आदि अष्ट कुमारिया

श्रेय शाह,अर्णव शाह,युवल दोसी,आर्ष सेठ,मनन शाह, तक्ष सेठ, अन्मय शाह व जिनाय सेठ आदि लोकांतिक देव का सौभाग्य प्राप्त कर रहे है।

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