संतो की सन्निधि में हुई धर्मसभा श्री यानी मोक्ष का फल देने वाला होता है श्रीफल भावसागर महाराज

धर्म

संतो की सन्निधि में हुई धर्मसभा श्री यानी मोक्ष का फल देने वाला होता है श्रीफल भावसागर महाराज
बांसातारखेड़ा
श्री पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार की बेला में मुनि श्री विमल सागर महाराज, अनंत सागर महाराज, धर्मासागर महाराज एवम भावसागर महाराज की सन्निधि में धर्म सभा हुई।

 

 

धर्म सभा में सर्वप्रथम आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का पूजन किया गया चित्र अनावरण किया गया दीप प्रज्वलन किया गया एवं शस्त्र भेद किए गए। इसी क्रम में पूज्य मुनि श्री विमल सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज बच्चे विद्या की विनय नहीं करते हैं, पहले पुस्तक सर पर रखकर लाते थे, आज पीठ पर रखकर लाते हैं, विद्या की विनय करने से विद्या आती है।

 

 

धर्म सभा में पूज्य मुनि श्री अनंत सागर महाराज ने धार्मिक क्रियाओ का महत्व बताया। पूज्य मुनि श्री भावसागर महाराज ने कहा कि मंदिर प्रतिमा पूजन भक्ति एवं मंत्र जब आदि धार्मिक क्रिया ही चारों ओर के वातावरण आवामंडल और अपने विचारों को बदलने का सशक्त माध्यम है। इन क्रियो से सीधे पाप कर्म नष्ट नहीं होते, बल्कि आसपास का माहौल बदलता है। विचार बदलते हैं। विचारों के परिवर्तन से कार्बन नष्ट होते है। विचारों की परिवर्तन से कर्म नष्ट होते हैं। भगवान के ऊपर प्रथम छत्र का आकार इतना बड़ा होना चाहिए, की प्रतिमा के दोनों कान नाक का अग्रभाग एवं सिर पूर्णतः ढक जाए। परंतु सर से थोड़ा ऊपर छत्र इस ढंग से लगाना चाहिए, जिस की प्रतिमा पूर्णता दृष्टिगोचर हो और अभिषेक आदि कर सके।

 

 

 

महाराज श्री ने कहा कि छत्रदान करने से व्यक्ति एक छत्र राज करता है। छत्र देने वाला और चवर दान करने से उसके ऊपर चवर ढूरते है। श्रीफल के विषय में बोलते हुए कहा कि श्रीफल की महिमा परंपरा है श्री यानी मोक्ष का फल देने वाला होता है श्रीफल चांदी भक्ति में आचार्य पूज्यपात स्वामी जी ने लिखा है कि विद्या, औषधि, मंत्र, जल, हवन आदि अपना अपना कार्य करते हैं। मंदिर के लिए प्रभु के लिए जो भी अर्बन किया जाता है वह पूजा के अंतर्गत आता है। भक्ति में तन मन के साथ हम प्रभु को सर्वश्रेष्ठ सामग्री अर्पण करते हैं।

 

उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध किया है चावल नेगेटिव एनर्जी को खींचता है। मंदिर सुख शांति समृद्धि प्रदान करने वाले होते हैं। भगवान को छत्र, चवर, भामंडल प्रतिमा विराजमान करवाना, वेदी का निर्माण, मंदिर के लिए भूमि आदि का दान भी पूजन के अंतर्गत आता है। इसलिए मंदिर के लिए हमेशा सर्वश्रेष्ठ सामग्री का दान करते रहना चाहिए। गरीब से अमीर बनता है। दान देने से व्यक्ति भगवान बनता है। दान  देने से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध मिलती है। जीवन में पाप कम होता है और पुण्य की वृद्धि होती है। इसके साथ ही इष्ट पदार्थों की प्राप्ति होती रहती है। और आगामी भवो में इसका फल मिलता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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