आचार्य शांतिसागर धाम सम्मेद शिखरजी रामगंजमंडी के भक्त दर्शन कर अभिभूत

धर्म

आचार्य शांतिसागर धाम सम्मेद शिखरजी रामगंजमंडी के भक्त दर्शन कर अभिभूत

सम्मेदशिखर

20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र जहां की तलहटी पर अनेकों जिनालय निर्मित हैं उनमें से एक है शांति सागर धाम जहा के जिनालय की प्रतिमा अभूतपूर्व है वही चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांतिसागर महाराज की विराजित प्रतिमा अलौकिक चित्रण देती है। इस पावन तीर्थ के दर्शन कर रामगंज मंडी के भक्तजन अभिभूत हो गए एवं भाव विभोर हो उठे।

आचार्य श्री शांतिसागर
धाम की स्थापना
बीसवीं शताब्दी के प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती 108 आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज 7शिष्यों के साथ
न सन् -1927,1928 में दक्षिण प्रांत से विहार करके सम्मेद शिखर
सिद्ध क्षेत्र की यात्रा की थी। ऐसे गुरूणामगुरू आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की स्मृति में पूज्या गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से ‘दिगम्बर जैन त्रिलोक
शोध संस्थान जम्बूद्वीप हस्तिनापुर के अन्तर्गत सम्मेद शिखर पावन तीर्थ पर सन् 2013 में आचार्य श्री शांतिसागर धाम’ की स्थापना की गई है।

 

आपको बता दे तीर्थकरो की श्रृंखला में भगवान अजितनाथ

 

द्वितीय तीर्थंकर सम्मेद शिखर सेसर्वप्रथम मोक्ष गये हैं इसलिए भगवान अजितनाथ की 31 फुट उत्तुंग प्रतिमा तथा 24 तीर्थंकरों की प्रतिमाएं यहाँ विराजमान की गई हैं। पूज्या गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी वर्तमान में जैन समाज की सर्वप्राचीन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दीक्षित आर्यिका हैं जिन्होंने आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के सन 1954 एवं 1955 में क्षुल्लिका अवस्था में 3 बार दर्शन किये हैं तथा प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से सन1956 में माधोराजपुरा (जिला जयपुर) राजस्थान में आर्थिका दीक्षा प्राप्त की है।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *