अहंकार छोड़ें और सेवा भाव अपनाएं: आर्यिका माताजी बुढ़ापे में भी धर्म नहीं किया तो जीवन व्यर्थ स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
अतिशय क्षेत्र में बुधवार को हुई धर्मसभा में भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने धर्म और त्याग का महत्व बताया।
उन्होंने कहा कि मानव का बचपन अज्ञान में और जवानी गृहस्थी की उलझनों में बीत जाती है। यदि बुढ़ापे में भी धर्म-कर्म नहीं किया तो यह जीवन व्यर्थ है। माताजी ने कहा कि सच्ची संतुष्टि भोग-विलास में नहीं, बल्कि त्याग और तपस्या में है। उन्होंने उदाहरण दिया कि नृत्यांगना नीलांजना की मृत्यु देखकर ही भगवान आदिनाथ ने संसार की असारता समझी और वैराग्य लिया था। अहंकार से बचने का उपाय बताते हुए माताजी ने कहा कि कभी दूसरों से अपनी तुलना न
करें।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
